* प्राकृतिक स्रोतों के भरोसे आदिवासी परिवार
* सूखे नल और खराब हैंडपंप से बढ़ी उनकी परेशानी
* जंगलों से पानी लाने मजबूर ग्रामीण
कोरबा (मंथन) जानकारी के अनुसार कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बसे ग्राम खेतार में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है। ग्राम के दर्जनों आदिवासी परिवार जल की समस्या से जूझ रहे हैं और प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया की ग्राम में लंबे समय से पेयजल व्यवस्था चरमराई हुई है। जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए नलों में पानी नहीं आ रहा, जबकि पीएचई विभाग के कई हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हुए हैं। इसके कारण ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए जंगलों के बीच स्थित झिरिया और प्राकृतिक नालों से पानी लाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने आगे बताया कि पानी लाने के लिए उन्हें कच्ची पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है, जहां जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है। इसके बावजूद मजबूरी में लोग उन्हीं जल स्रोतों पर निर्भर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। ग्राम सरपंच ने भी बताया कि पीएचई विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है।भीषण गर्मी के दौर में पेयजल संकट ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द खराब हैंडपंप सुधारने और जल जीवन मिशन के तहत नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
11 मई / मंथन मित्तल



