* 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद के साथ कोल परिवहन रोकने की चेतावनी
कोरबा (मंथन) छत्तीसगढ़ किसान सभा ने एसईसीएल की कुसमुंडा खदान क्षेत्र में आउट सोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से होने वाले कामों में प्रभावित भू-विस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर कुसमुंडा से बाइक रैली कलेक्टर कार्यालय तक निकालने के बाद कोसाबाड़ी चौक में प्रदर्शन कर कलेक्टर कोरबा और एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा है। किसान सभा ने ज्ञापन के माध्यम से मांगो पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद करने के साथ कोल परिवहन को पूर्ण रूप से रोकने की चेतावनी भी दी है। इस आंदोलन को भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने भी अपना समर्थन दिया है।
किसान सभा ने आरोप लगाते हुए कहा कि एसईसीएल में जमीन अधिग्रहण के बाद हर गांव के भू-विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं, जमीन अधिग्रहण के समय कई नियमों को बनाकर विस्थापित होने वाले छोटे किसानों को रोजगार से वंचित कर दिया जाता है। आऊट सोर्सिंग के माध्यम से भी होने वाले काम में आऊट सोर्सिंग कंपनियों द्वारा मनमानी की जा रही है। जिससे भू-विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं। आऊट सोर्सिंग कंपनियों के मनमानी के खिलाफ छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने विरोध करने का निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने कहा की एसईसीएल में जमीन अधिग्रहण के बाद हजारों भू विस्थापित रोजगार के लिए भटक रहे हैं और प्रबंधन आऊट सोर्सिंग कंपनियों के साथ सांठगांठ कर रोजगार को बेचने का काम कर रही है। जिसका विरोध हमारे द्वारा किया जा रहा है। कुसमुंडा और गेवरा में होने वाले कार्यों में प्रभावितों को प्राथमिकता नहीं दिया जा रहा है, जिसके विरोध की शुरुआत कुसमुंडा में किया गया है। मांगो पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद के साथ कोल परिवहन को पूर्ण रूप से रोका जाएगा।
किसान सभा के जिला अध्यक्ष जय कौशिक और सचिव दीपक साहू ने आरोप लगाते हुए कहा की खदान विस्तार के लिए ग्रामीणों की पूरी जमीन ली जाती है, लेकिन रोजगार देते समय 100% रोजगार प्रभावित ग्रामीणों को नहीं दिया जा रहा है। 30% बाहर के लोगों के नाम पर प्रभावितों के हक के रोजगार को बेचा जा रहा है। विकास के नाम पर अपनी गांव और जमीन से बेदखल कर दीये गए विस्थापित परिवारों की जीवन स्तर सुधरने के बजाय और भी बदतर हो गई है। हजारों छोटे किसानों को खेती किसानी से अलग कर रोजगार से वंचित रखा गया है। विकास की जो नींव कोरबा में रखी गई है उसमें प्रभावित परिवारों की अनदेखी हो रही है। लगातार संघर्ष के बाद खानापूर्ति के नाम पर कुछ लोगों को वैकल्पिक रोजगार दिया जा रहा है। प्रभावितों के पास अब संघर्ष के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है।
भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के रेशम यादव और दामोदर श्याम ने आरोप लगाते हुए कहा की जिनकी जमीन गई है उन्हें ना तो स्थाई रोजगार मिल रहा है ना ही उनके परिवार को आऊट सोर्सिंग में काम सभी के हक को बेचा जा रहा है इसके विरोध में एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधक कार्यालय और कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया है। समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो और उग्र प्रदर्शन होगा।
उक्त प्रदर्शन में प्रमुख रूप से जय कौशिक, दामोदर श्याम, रेशम यादव, उत्तम दास, सम्मेलाल, गणेश बिंझवार, दिलीप कंवर, विकास बिंझवार, आनंद पाल, महेंद्रा, संजय, जीवन सारथी, हरि साहू, राजेश्वर दास, नटवर लाल, मनोज महंत, मनीष, हरिहर साहू, श्याम सुंदर महंत, गुड्डू राठौर, रामकुमार, जयचंद, हेमंत पटेल, शशि यादव, गुरु शरण, मनोज आदि के साथ बड़ी संख्या में भू-विस्थापित और ठेका मजदूर उपस्थित थे।
27 अक्टूबर / मंथन मित्तल





