कोरबा (मंथन) कोरबा जिला प्रशासन के अंतर्गत संचालित डिस्ट्रिक्ट मिनिरल फाऊंडेशन द्वारा लोगों को सुविधा देने के लिए 20 लाख के मद से पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के बनिया ग्राम पंचायत के ग्राम सेमरहा में बनाई गई पुलिया निर्माण के कुछ ही महीनों बाद क्षतिग्रस्त हो गई। इस वजह से लोगों को राहत तो नहीं मिली बल्कि एक नई आफत सामने आ गई।
बताया जा रहा हैं की पुलिया के क्षतिग्रस्त होने से बारिश के दौरान ग्रामीणों और विद्यालयीन छात्रों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है। इस कार्य के लिए प्रशासन ने ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाया था जबकि आरईएस ने अपनी निगरानी में निर्माण किया।स्थानीय निवासीयो ने आरोप लगाते हुए कहा की यहां पर पाइप डालकर घटिया क्वालिटी की पुलिया तैयार कर दी गई। किसी भी पुलिया का निर्माण केवल पाइप डालकर रास्ता तैयार कर देने तक सीमित नहीं होता। निर्माण से पहले स्थल का तकनीकी सर्वे, नाले में पानी के सामान्य और अधिकतम बहाव का आंकलन, मिट्टी और नींव की स्थिति की जांच, उचित आकार और क्षमता की पाइप/कल्वर्ट का निर्धारण तथा डिजाइन और तकनीकी स्वीकृति जरूरी होती है। इसके बाद निर्धारित मापदंड के अनुसार नींव, बेस, पाइप की स्थापना, एप्रोच और सुरक्षा संरचना का निर्माण किया जाता है। निर्माण के दौरान संबंधित तकनीकी अधिकारियों और इंजीनियर की जिम्मेदारी होती है कि काम स्वीकृत डिजाइन और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो। निर्माण पूरा होने के बाद भी माप, गुणवत्ता परीक्षण और कार्य की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने आगे कहा की ऐसे में ग्राम सेमहरा की पुलिया निर्माण के कुछ महीनों में ही क्षतिग्रस्त होने के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन प्रक्रियाओं का पालन किस स्तर तक किया गया ? ग्रामीणों का कहना है कि डीएमएफ मद से खर्च किए गए करीब 20 लाख रुपये की शासकीय राशि का उचित उपयोग नहीं हुआ। अगर पुलिया इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हो गई तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर, संबंधित अधिकारी और निर्माण एजेंसी की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
पुलिया क्षतिग्रस्त होने के कारण को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से इसे अतिवृष्टि और तेज बारिश का परिणाम बताया जा रहा है। ग्रामीण इस तर्क से असहमत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण के समय पुलिया की जगह, पानी के बहाव, पाइप की क्षमता, नींव और संरचना की पर्याप्त तकनीकी जांच की गई होती, तो इतनी जल्दी पुलिया की यह स्थिति नहीं होती।
14 सितंबर / मंथन मित्तल





