कोरबा (मंथन) कोरबा अंचल के सीतामणी क्षेत्र में स्थापित आस्था स्थल सप्तदेव मंदिर, कोरबा में श्री भादी अमावस्या उत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर में दिन भर धार्मिक अनुष्ठान जारी रहे।
भादी अमावस्या के अवसर पर प्रात:काल आस्था स्थल श्री सप्तदेव मंदिर में भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती के साथ जात-पूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ। आस्था स्थल में श्री सप्तदेव महिला मंडल द्वारा भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया गया। भादी अमावस्या उत्सव का मुख्य आकर्षण श्रीराणी सती दादी चरित्र मानस का भव्य मंगल पाठ रहा। सायं 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक सैकड़ों महिलाओं ने सामूहिक रूप से मंगल पाठ में सहभागिता दी। सूरत, गुजरात की विख्यात मंगल पाठ कलाकार वर्षा सोनी अपनी पूरी पार्टी एवं कलाकारों के साथ विशेष रूप से यहाँ पहुंचीं। उनके मंगल गीतों एवं भजनों की मनोहारी प्रस्तुतियो से सभी के मन को मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी मातृशक्ति की सामूहिक सहभागिता तथा दादी जी के जयघोष से श्री सप्तदेव मंदिर परिसर भक्तिरस में डूब गया।
मंगल पाठ के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने परिवार, समाज, नगर एवं देश में सुख-शांति, समृद्धि, सौहार्द एवं मंगल की कामना करते हुए श्री राणी सती दादी से प्रार्थना की। सामूहिक मंगल पाठ के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं का उत्साह एवं भक्ति देखते ही बन रही थी। श्री सप्तदेव मंदिर में आयोजित भादी अमावस्या उत्सव में कोरबा नगर के अनेक समाजों, धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं, महिला मंडलों तथा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। श्री सप्तदेव मंदिर ट्रस्ट परिवार द्वारा वर्षभर श्री राणी सती दादी के सर्वाधिक मंगल पाठ करने वाली महिलाओं एवं बालिकाओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।
धार्मिक गतिविधियों में निरंतर सहभागिता को प्रोत्साहित करने की इस परंपरा के अंतर्गत कुल 34 पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें 22 प्रथम, 7 द्वितीय एवं 5 तृतीय पुरस्कार शामिल रहे। सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त करने वाली मंगल पाठ करने वाली बहनों में विशेष उत्साह एवं प्रसन्नता दिखाई दी। उन्होंने श्री सप्तदेव मंदिर ट्रस्ट परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस धार्मिक परंपरा को आगे भी निरंतर बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया। मंदिर ट्रस्ट परिवार की इस पहल का उद्देश्य महिलाओं एवं बालिकाओं को धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोडऩा तथा नई पीढ़ी तक भक्ति, संस्कार एवं सनातन परंपराओं को पहुंचाना हैं।
ट्रस्ट के प्रमुख अशोक मोदी ने जानकारी देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन लोगों को अपनी परंपरा, संस्कृति, धर्म और राष्ट्र के मूल्यों से जोडऩे का काम करते है। मंदिर प्रबंधन आगे भी इस तरह की गतिविधियों को संचालित करेगा।
14 सितंबर / मंथन मित्तल





