* पाली क्षेत्र में डाल गिरने के मामले में आया बड़ा अपडेट
कोरबा (मंथन ) कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरकाडांड में आंधी-तूफान और बारिश के दौरान हुई दर्दनाक घटना में एक युवक व दो किशोरों की मौत के मामले में अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी में बताया गया था कि तीनों लोग बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे, तभी पेड़ की भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई। मीडिया के मौके पर पहुंचने के बाद सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
जानकारी के अनुसार घटनास्थल पर देखा गया कि कोई डाल नहीं टूटी थी, बल्कि एक विशाल धौरा का पेड़ जड़ सहित गिरा हुआ था। ग्रामीणों, मृतक दिनेश तिर्की के परिजनों तथा निर्माण कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि घटनास्थल पर वन समिति के माध्यम से सूअर पालन के लिए कोठा निर्माण का कार्य चल रहा था। बताया जा रहा हैं की आंधी-तूफान के दौरान धौरा वृक्ष से आवाज आई और कुछ ही क्षणों में वह निर्माण स्थल पर गिर पड़ा। पेड़ के नीचे काम कर रहे युवक उसकी चपेट में आ गए। घटना में एक महिला को भी सिर और हाथ में हल्की चोटें आईं, जिसने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। घटना में युवक और दोनों किशोर की मौत हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र होने के कारण हादसे के तत्काल बाद वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया और अस्पताल पहुंचने में करीब ढाई घंटे का विलंब हुआ। जब इस संबंध में वन विभाग से जानकारी ली गई तो विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य में युवकों/किशोरों को लगाए जाने से इंकार किया। यहीं से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण कार्य में युवक शामिल नहीं थे तो वे घटनास्थल पर क्या कर रहे थे ? जबकि ग्रामीण, परिजन और वहां मौजूद महिलाएं निर्माण कार्य में लगे होने की बात कह रही हैं। यदि वन समिति के अंतर्गत निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां कार्यरत लोगों की निगरानी कौन कर रहा था ? निर्माण स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे ? क्या कार्य शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आंकलन किया गया था ? यदि नाबालिग मौके पर मौजूद थे तो उनकी उपस्थिति किन परिस्थितियों में थी ? क्या निर्माण कार्य के लिए मजदूरों का कोई पंजीयन या उपस्थिति रजिस्टर रखा गया था ? दुर्घटना के समय वहां कितने लोग काम कर रहे थे और उन्हें किसके निर्देश पर लगाया गया था ? आखिर घटना के संबंध में सामने आ रहे अलग-अलग दावों में सच्चाई क्या है ?
पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना के समय वहां वास्तव में क्या कार्य चल रहा था,नाबालिगों से काम लिया जा रहा था और इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? फिलहाल यह मामला केवल प्राकृतिक दुर्घटना तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
04 जून / मंथन मित्तल



