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    कोरबा

    (कोरबा) एसईसीएल की रेटिंग में आई गिरावट-‘एक्सीलेंट’ से ‘वेरी गुड’ श्रेणी में पहुंची कंपनी

    By Vinod Mittal05/08/2026
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    कोरबा (मंथन) कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनियों के वित्तीय वर्ष 2024-25 के एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) स्कोर और रेटिंग जारी कर दी गई है। इस बार दक्षिण-पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की रेटिंग में गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी को 76.78 अंक के साथ “वेरी गुड” रेटिंग प्राप्त हुई है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में एसईसीएल को “एक्सीलेंट” रेटिंग मिली थी। रेटिंग में आई इस गिरावट का असर अब अधिकारियों को मिलने वाले परफॉर्मेंस रिलेटेड पेमेंट (पीआरपी) पर भी दिखाई देगा।
    पिछले वर्ष एक्सीलेंट रेटिंग मिलने के कारण एसईसीएल अधिकारियों को बेहतर पीआरपी भुगतान मिला था, लेकिन इस बार “वेरी गुड” रेटिंग मिलने से भुगतान राशि में कमी आने की संभावना है। एसईसीएल में करीब 2400 अधिकारी कार्यरत हैं, जिन पर इस निर्णय का सीधा प्रभाव पड़ेगा।
    जानकारी के अनुसार, कोल इंडिया बोर्ड की 490वीं बैठक में लिए गए निर्णय के बाद 27 अप्रैल को वित्तीय वर्ष 2024-25 के एमओयू प्रदर्शन मूल्यांकन परिणामों को लेकर आधिकारिक आदेश जारी किया गया। इसमें कोल इंडिया की सभी सहायक कंपनियों और सीएमपीडीआईएल (सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड) के प्रदर्शन का मूल्यांकन शामिल किया गया है।
    जारी रिपोर्ट के अनुसार कोल इंडिया की चार कंपनियों ने 90 से अधिक अंक प्राप्त करते हुए “एक्सीलेंट” श्रेणी हासिल की है। इनमें सीएमपीडीआईएल, एमसीएल (महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड), डब्ल्यूसीएल (वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) और एनसीएल (नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) शामिल हैं। इन कंपनियों का प्रदर्शन उत्पादन, परिचालन दक्षता, वित्तीय उपलब्धियों और तय लक्ष्यों की प्राप्ति के आधार पर उत्कृष्ट माना गया है।
    एसईसीएल के अलावा बीसीसीएल और सीसीएल को “वेरी गुड” रेटिंग मिली है। हालांकि एसईसीएल का स्कोर अन्य दोनों कंपनियों की तुलना में बेहतर माना जा रहा है, लेकिन पिछली बार की एक्सीलेंट रेटिंग की तुलना में यह गिरावट कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। रिपोर्ट में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) का प्रदर्शन सबसे कमजोर दर्ज किया गया है। कंपनी को 57.59 अंक प्राप्त हुए हैं और उसे “गुड” रेटिंग दी गई है। मूल्यांकन के आधार पर यह प्रदर्शन अन्य सहायक कंपनियों की तुलना में काफी नीचे माना जा रहा है।
    जानकारों के अनुसार, एसईसीएल की रेटिंग घटने के पीछे सबसे बड़ा कारण वित्तीय वर्ष 2024-25 में अपेक्षा से कम कोयला उत्पादन रहा। पिछले तीन वर्षों की तुलना में इस बार कंपनी का उत्पादन सबसे कम रहा। एसईसीएल ने वर्ष 2024-25 में करीब 167 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया, जो निर्धारित लक्ष्य और पूर्व वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में कमजोर माना जा रहा है। हालांकि एमओयू मूल्यांकन केवल उत्पादन के आधार पर नहीं किया जाता। इसमें परिचालन दक्षता, वित्तीय प्रदर्शन, लागत नियंत्रण, पर्यावरणीय प्रबंधन, सुरक्षा मानक, परियोजनाओं का क्रियान्वयन, उत्पादकता और प्रशासनिक क्षमता जैसे कई मानकों को भी शामिल किया जाता है। इन सभी बिंदुओं के आधार पर कंपनियों को अंक दिए जाते हैं और उसी के अनुसार उनकी रेटिंग तय होती है।
    एमओयू यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग प्रणाली के तहत केंद्र सरकार सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन का वार्षिक मूल्यांकन करती है। यह प्रक्रिया वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले लोक उद्यम विभाग (डीपीई) द्वारा संचालित की जाती है। डीपीई केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करता है और कंपनियों के वास्तविक प्रदर्शन की तुलना इन लक्ष्यों से कर उन्हें अंक और रेटिंग प्रदान करता है। रेटिंग की प्रमुख श्रेणियों में एक्सीलेंट, वेरी गुड, गुड, फेयर और पुअर शामिल हैं। इसी रेटिंग के आधार पर कंपनियों के अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलने वाले पीआरपी की राशि तय होती है।
    कोल इंडिया लिमिटेड को उसकी सहायक कंपनियों के समग्र प्रदर्शन के आधार पर 84.46 अंक प्राप्त हुए हैं। इसके आधार पर कंपनी को “वेरी गुड” रेटिंग दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुछ प्रमुख सहायक कंपनियों का प्रदर्शन और बेहतर रहता तो कोल इंडिया को भी “एक्सीलेंट” श्रेणी मिल सकती थी। एसईसीएल अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस बार की रेटिंग चर्चा का विषय बनी हुई है। खासकर पीआरपी भुगतान में संभावित कमी को लेकर अधिकारियों में असंतोष देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि उत्पादन संबंधी चुनौतियों, मौसम, परिवहन बाधाओं और कई प्रशासनिक कारणों का असर कंपनी के समग्र प्रदर्शन पर पड़ा है। वहीं प्रबंधन स्तर पर अब आगामी वित्तीय वर्ष में उत्पादन और परिचालन सुधार पर विशेष जोर दिए जाने की संभावना जताई जा रही है, ताकि कंपनी फिर से “एक्सीलेंट” श्रेणी में वापसी कर सके।

    08 मई / मंथन मित्तल

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