* ‘जल है तो कल है’ के संकल्प के साथ वैज्ञानिक एक्वीफर प्रबंधन और ‘कैच द रेन’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर
कोरबा (मंथन) कोरबा जिले में भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और भूजल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में कोरबा नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। नगर निगम के पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार में भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत संचालित अमृत 2.0 के साइंटिफिक एक्वीफर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट एवं ‘कैच द रेन’ अभियान के संबंध में आयोजित वर्चुअल बैठक में जल संरक्षण एवं सतत जल प्रबंधन के विभिन्न आयामों पर विस्तृत मंथन किया गया।
बैठक में भूजल स्तर को संरक्षित करने, वर्षा जल संचयन को प्रभावी बनाने, वैज्ञानिक पद्धति से एक्वीफर प्रबंधन को लागू करने तथा शहरी क्षेत्रों में जल संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर विशेष चर्चा की गई। इसके साथ ही जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण अभियानों को घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
वर्चुअल बैठक में इस बात पर भी सहमति व्यक्त की गई कि बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। वर्षा जल संचयन और भूजल संवर्धन के वैज्ञानिक उपायों को अपनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं समृद्ध जल संसाधनों का निर्माण किया जा सकता है।
बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने अमृत 2.0 के अंतर्गत संचालित एसएएम प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वैज्ञानिक एक्वीफर प्रबंधन के माध्यम से भूजल स्रोतों की पहचान, संरक्षण एवं पुनर्भरण की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। वहीं ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से नागरिकों को वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे, पार्षद नरेंद्र देवांगन, मुकुंद सिंह कंवर, अजय गोंड, सुरेंद्र दुबे, एल्डरमैन रितेश साहू सहित जनप्रतिनिधिगण एवं नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने जल संरक्षण को जन-जागरूकता से जोड़ते हुए इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करने का आह्वान किया।
* “हर बूंद अनमोल, जल संरक्षण बने जन-जन का संकल्प”
बैठक में यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि यदि आज जल संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य की चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। इसलिए समय की मांग है कि प्रत्येक नागरिक वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाए।
21 जुलाई / मंथन मित्तल



