* आबकारी टीम को पहले चकमा देकर हुई थी फरार
* युवती की झूठी शिकायत पर कटघोरा थाने के दो आरक्षकों पर गिरी थी गाज
कोरबा (मंथन) कोरबा जिले में अवैध मादक द्रव्य पदार्थ से जुड़े कारोबारियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग की टीम ने ग्राम रजकम्मा में बड़ी कार्यवाही की थी। आवासपारा रजकम्मा में दबिश देकर टीम ने 13.2 लीटर अवैध महुआ निर्मित्त मादक द्रव्य पदार्थ जब्त करते हुए एक महिला को आबकारी अधिनियम की गैर-जमानती धारा 34(2) के तहत गिरफ्तार किया था। वहीं कार्यवाही के दौरान मादक द्रव्य पदार्थ से कारोबार से जुड़ी एक अन्य संदिग्ध युवती ने आबकारी अमले को भ्रमित करने के लिए अपना नाम ‘पिंकी’ बताया और मौका पाकर वहां से भाग निकली थी। लेकिन इस बार कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकी।
* बड़ी सरगर्मी से हो रही थी फरार की तलाश
अवैध मादक द्रव्य पदार्थ के कारोबार से जुड़ी महिला की गिरफ्तारी के लिए कटघोरा पुलिस की टीम हर संभावित जगहों पर दबिश दे रही थी। इसी बीच मुखबिर की सूचना पर आवासपारा रजकम्मा में आबकारी वृत्त दीपका की
महिला को 7.2 लीटर अवैध महुआ निर्मित्त मादक द्रव्य पदार्थ के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34-(2) गैर जमानती मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।
अवैध महुआ निर्मित्त मादक द्रव्य पदार्थ का धंधा अच्छा फलता फूलता रहे इसके लिए कर्तव्यनिष्ठ आरक्षकों को ही रास्ते से हटाने की साजिश इनके द्वारा रची गयी। यह वही परिवार है जिसके सदस्य महिला के भाई कुछ समय पूर्व पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचकर कटघोरा थाने के दो कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए अवैध महुआ निर्मित्त मादक द्रव्य पदार्थ बिक्री के आरोपों से साफ इनकार कर दिया था। उस वक्त प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया था। लेकिन, आबकारी विभाग की इस बड़ी कार्यवाही ने अब यह साफ कर दिया है कि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप महज एक पैंतरा थे, ताकि निष्पक्ष कार्यवाही करने वाले पुलिसकर्मियों का मनोबल तोड़ा जा सके और अवैध महुआ निर्मित्त मादक द्रव्य पदार्थ का धंधा बिना किसी रुकावट के फलता-फूलता रहे।
स्थानीय लोगों का भी मानना है कि अवैध महुआ निर्मित्त मादक द्रव्य पदार्थ बेचने वाले अक्सर कानून के शिकंजे से बचने के लिए पुलिस पर अनर्गल आरोप लगाकर दबाव बनाने की चाल चलते हैं। रजकम्मा की इस घटना ने साफ कर दिया है कि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत और जांच को भटकाने की साजिश के सिवा कुछ भी नहीं है। बहरहाल, बेगुनाह होकर विभागीय कार्यवाही का दंश झेल रहे पुलिसकर्मियों को कब राहत मिलेगी, यह देखने वाली बात होगी।
25 सितंबर / मंथन मित्तल





