* संयंत्रों में जरूरी रखरखाव किया गया शुरू
कोरबा (मंथन) मानसून की दस्तक के बाद से कोरबा जिले में हो रही बारिश का असर बिजली की खपत पर दिखने लगा है। घरेलू बिजली की मांग करीब दो हजार मेगावाट तक घट गई है। मांग कम होने से राज्य बिजली उत्पादन कंपनी ने अपने संयंत्रों जरूरी रखरखाव शुरू कर दिया है। एचटीपीपी कोरबा-पश्चिम संयंत्र 210 मेगावाट की एक नंबर इकाई को एक सप्ताह के शॉर्ट शटडाउन पर लिया है।
कोरबा जिले के एचटीपीपी और डीएसपीएम पावर प्लांट से बनने वाली बिजली से कोरबा के साथ प्रदेश के दूसरे जिलों को भी आपूर्ति की जा रही है। इस बार मानसून करीब 15 दिन देरी से पहुंचा। इसी वजह से जून के दूसरे पखवाड़े तक बिजली की अधिकतम मांग छह हजार मेगावाट से ऊपर बनी रही। बढ़ी हुई मांग के कारण संयंत्रों का रखरखाव टालना पड़ा। अब बारिश के बाद मांग घटने से एचटीपीपी ने एक इकाई को रखरखाव के लिए बंद किया है। इसके चालू होने के बाद दूसरी इकाइयों का भी चरणबद्ध रखरखाव किया जाएगा।
बारिश से लोगों को उमस से राहत मिली। बारिश के बाद प्रदेश में बिजली की मांग घटकर पांच हजार मेगावाट से भी नीचे पहुंच गई। एचटीपीपी की एक इकाई बंद रहने के बावजूद अतिरिक्त बिजली लेने की जरूरत नहीं पड़ी। केंद्रीय क्षेत्र से तय हिस्से की बिजली और उत्पादन कंपनी के संयंत्रों से बनी बिजली से मांग पूरी की गई। जरूरत पड़ने पर कंपनी के पास 120 मेगावाट क्षमता वाले हाइडल प्लांट से बिजली उत्पादन का भी विकल्प मौजूद है।
08 जुलाई / मंथन मित्तल



