* छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्यवाही
* हसदेव बैराज तक पहुंच गया था राखड़युक्त पानी
* 39 दिनों तक नियमों का मखौल उड़ाने का आरोप
कोरबा (मंथन ) हसदेव थर्मल पावर प्लांट ऐश डाइक लेक हसदेव ताप विद्युत गृह (पूर्व) के ऐश डाइक (राखड़ डैम) में दरार आने और उससे निकले राखड़युक्त पानी से हुए गंभीर जल प्रदूषण के मामले में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कड़ी कार्यवाही की है। मंडल ने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीजीसीएल) पर 27 लाख 60 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (जुर्माना) अधिरोपित की है। प्लांट प्रबंधन को यह राशि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर चुकानी होगी।
पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय कोरबा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ऐश डाइक में दरार के कारण भारी मात्रा में राख मिश्रित पानी आसपास के क्षेत्रों और प्राकृतिक जल स्रोतों की ओर बहने लगा था। इससे पूरे इलाके में जल प्रदूषण की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई थी और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा।
* अधिकारियों के निरीक्षण में खुली पोल, दो बार दिया गया नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पर्यावरण मंडल की टीम ने 18 मार्च को संयंत्र का औचक निरीक्षण किया था। जांच में ऐश डाइक से लगातार राख रिसने और पानी के बहाव की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रबंधन को जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों के तहत नोटिस जारी कर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। 19 अप्रैल को जब मंडल की टीम ने दोबारा निरीक्षण किया, तो स्थिति और भयावह मिली। राखड़ बांध से भारी मात्रा में राख का रिसाव जारी था और यह प्रदूषित पानी हसदेव बैराज क्षेत्र तक पहुंच चुका था। इस घोर लापरवाही पर मंडल ने 22 अप्रैल को दोबारा नोटिस जारी कर तत्काल प्रभाव से कार्यवाही करने को कहा।
* 18 मार्च से 25 अप्रैल तक हुआ नियमों का उल्लंघन
कार्यवाही के बाद संयंत्र प्रबंधन ने अपनी सफाई में बताया कि लैगून-बी के क्षतिग्रस्त होने के कारण यह हादसा हुआ था, जिसके बाद ऐश स्लरी का डिस्चार्ज अस्थायी रूप से बंद कर मरम्मत कार्य शुरू किया गया। प्रबंधन ने दावा किया कि 25 अप्रैल से हसदेव बैराज क्षेत्र में राखयुक्त जल का प्रवाह पूरी तरह बंद कर दिया गया है। हालांकि, पर्यावरण संरक्षण मंडल ने माना कि 18 मार्च से 25 अप्रैल तक (कुल 39 दिन) पर्यावरणीय नियमों का लगातार उल्लंघन किया गया, जिसके एवज में यह भारी जुर्माना तय किया गया है।
22 जून /मंथन मित्तल



