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    कोरबा

    (कोरबा) हरदीबाजार चिकित्सालय स्थानांतरण के विरोध में ग्रामीणों का भड़का आक्रोश

    By Vinod Mittal09/10/2026
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    * मुआवजा विसंगति और रोजगार की मांग पर अड़े ग्रामीण
    कोरबा (मंथन) कोरबा-पश्चिम एसईसीएल दीपका क्षेत्र की परियोजना विस्तार योजना के तहत हरदीबाजार स्थित शासकीय चिकित्सालय के स्थानांतरण की कवायद को लेकर ग्रामीणों, भू-विस्थापितों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि मुआवजा विसंगति, रोजगार, बसाहट और अन्य मूल मांगों का समाधान होने तक चिकित्सालय का स्थानांतरण नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि चिकित्सालय को जबरन हटाने का प्रयास किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
    जानकारी के अनुसार उक्त मामले को लेकर हरदीबाजार तहसील कार्यालय में आपातकालीन बैठक आयोजित की गई। बैठक में पाली एसडीएम रोहित सिंह और तहसीलदार अमित क्रेकेटा उपस्थित रहे। इस दौरान हरदीबाजार पंचायत के सरपंच, उपसरपंच, जनपद सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण और भू-विस्थापित शामिल हुए। बैठक में चिकित्सालय स्थानांतरण के साथ-साथ एसईसीएल की परियोजना विस्तार से प्रभावित लोगों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
    ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नापी और सर्वे के बाद एसईसीएल दीपका एरिया प्रबंधन द्वारा तैयार किए गए मुआवजा पत्रक में करीब 40 प्रतिशत की विसंगति दर्शाई गई है, जिससे किसानों को उनकी भूमि का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा निर्धारण में 40 और 60 प्रतिशत के कथित नियम को लेकर उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण वर्षों से जमीन पर निर्भर मूल किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
    बैठक में ग्रामीणों ने केंद्रीय कोयला मंत्री के निर्देशों का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि हाल ही में कटघोरा विधायक के नेतृत्व में विस्थापितों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कोयला मंत्री से मुलाकात कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया था। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बाद एसईसीएल बिलासपुर मुख्यालय को किसानों के अधिकारों की रक्षा और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं किया जा रहा है।
    ग्रामीणों ने मांग की हैं कि मुआवजा पत्रक में दर्ज विसंगतियों को तत्काल दूर कर किसानों को उनकी भूमि का उचित मूल्य दिया जाए। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण से प्रभावित पात्र किसानों और विस्थापित परिवारों को शीघ्र रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। नए बसाहट स्थल पर चल रहे निर्माण और विकास कार्यों की धीमी गति पर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और काम में तेजी लाने की मांग की।
    ग्रामीणों का कहना है कि चिकित्सालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा है। जब तक विस्थापन से जुड़ी मूल समस्याओं और प्रभावित परिवारों के अधिकारों का समाधान नहीं होता, तब तक चिकित्सालय को यथावत रखा जाना चाहिए। ग्रामीणों ने कहा कि चिकित्सालय के स्थानांतरण से पहले स्वास्थ्य सुविधा के वैकल्पिक इंतजाम और विस्थापन से जुड़े सभी मुद्दों का न्यायसंगत समाधान जरूरी है।
    ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि वे विकास या कोयला खदान विस्तार के विरोधी नहीं हैं। उनका विरोध किसानों और भू-विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी को लेकर है। उन्होंने शासन-प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के साथ बैठकर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मुआवजा, रोजगार और बसाहट से जुड़ी मांगों का न्यायसंगत निराकरण होता है तो क्षेत्र का विकास और खदान विस्तार भी सुचारू रूप से आगे बढ़ सकता है।
    फिलहाल हरदीबाजार चिकित्सालय के स्थानांतरण को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि उनकी मांगों का समाधान किए बिना चिकित्सालय स्थानांतरण की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई तो आंदोलन और अधिक उग्र हो सकता है।

    10 सितंबर / मंथन मित्तल

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