* देशभर से जुटेंगे जायरीन
* इंतजामिया कमेटी ने तैयारियों से कराया रूबरू
कोरबा (मंथन) ऊर्जा नगरी कोरबा और पड़ोसी जिले बिलासपुर के मध्य स्थित प्रसिद्ध लुतरा शरीफ दरगाह में शहंशाहे छत्तीसगढ़ हजरत बाबा सैयद इंसान अली शाह का सालाना उर्स इस वर्ष 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। पांच दिवसीय उर्स को लेकर तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं।
इंतजामिया कमेटी दरगाह लुतरा शरीफ की ओर से एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर उर्स के कार्यक्रम और व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। कमेटी के अनुसार उर्स में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सहयोग से साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, आवागमन और विश्राम सहित अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की तैयारी की जा रही है। उर्स के दौरान सर्वधर्म समभाव की भावना के तहत शाकाहारी शाही लंगर की व्यवस्था भी रहेगी। परचम कुशाई से शुरू होगा उर्स 28 सितंबर को उर्स की शुरुआत दरगाह परिसर में परचम कुशाई की रस्म के साथ होगी। दुआ और अकीदत के बीच मुख्य परचम फहराया जाएगा। इसके बाद संदल-चादर का आयोजन होगा। रात 10 बजे ऑल इंडिया नातिया मुशायरा होगा, जिसकी सदारत कारी शब्बीर अहमद अशरफी कोरबा करेंगे। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से नात और मनकबत पेश करने वाले शायर शामिल होंगे।
29 सितंबर को गुस्ल और शाही संदलउर्स के दूसरे दिन 29 सितंबर को मजार-ए-पाक का गुस्ल और शाही संदल होगा। रात 9 बजे बाबा सरकार की शान में अजीमुशान जलसा-ए-तकरीर आयोजित किया जाएगा। इसमें किछौछा शरीफ से सैय्यद राशिद मक्की मियां की तकरीर होगी। 30 सितंबर को मुंबई के मुजतबा अजीज नाज़ा की कव्वाली30 सितंबर को अम्मी जान साहिबा की संदल-चादर की रस्म होगी। रात 10 बजे महफिले समा में मुंबई के रेडियो-टीवी सिंगर मुजतबा अजीज नाज़ा कव्वाली पेश करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में जायरीनों के शामिल होने की संभावना है। 1 अक्टूबर को रईस अनीस अंसारी की कव्वाली चौथे दिन 1 अक्टूबर को रात 10 बजे महफिले कव्वाली का आयोजन किया जाएगा। इसमें बिजनौर, उत्तर प्रदेश के रईस अनीस अंसारी अपनी कव्वाली पेश करेंगे। कुल की फातिहा के साथ 2 अक्टूबर को उर्स का समापन 2 अक्टूबर को उर्स के अंतिम दिन सुबह 11 बजे रंग की महफिल होगी। इसमें बिजनौर के रईस अनीस साबरी की मौजूदगी रहेगी। किछौछा शरीफ के सैय्यद महमूद अशरफ की सदारत में कुल की फातिहा के साथ पांच दिवसीय उर्स का समापन होगा। दोपहर से देर रात तक चलता रहेगा शाही लंगरइंतजामिया कमेटी के मुताबिक उर्स के सभी दिनों में दोपहर से देर रात तक दरबारी शाही लंगर यानी भंडारे की व्यवस्था लगातार जारी रहेगी।
कमेटी का कहना है कि लुतरा शरीफ में हर धर्म और समुदाय के लोग आस्था के साथ पहुंचते हैं। उर्स के दौरान भी सर्वधर्म समभाव की परंपरा को कायम रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर रहेगा। बिलासपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर है लुतरा शरीफ बिलासपुर-बलौदा मुख्य मार्ग पर स्थित है। बिलासपुर जंक्शन से इसकी दूरी करीब 30 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से बिलासपुर से सीपत होते हुए बलौदा की ओर जाने वाले मार्ग से लुतरा शरीफ पहुंचा जा सकता है। रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से भी सड़क मार्ग के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। उर्स को लेकर कमेटी और प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाले जायरीनों को आवागमन, ठहरने, पेयजल, सुरक्षा और भोजन सहित किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
पत्रकार वार्ता के दौरान सदर हाजी मो. इकबाल हक, खजांची फैजान अहमद शेबू, नूरी मज़ीद सदर मो. आरिफ खान, नायव खजांची- जावेद रब्बानी (कोरबा) लंगर इंचार्ज हाजी मो. कुदुस (बिलासपुर) मेंबर्स- हाजी मो. नजीर अहमद (बलौदा), मो. सज्जाद सिद्दीकी (कोरबा), सैयद इंसान अली (बिलासपुर), शेख सिकंदर (बिलासपुर), मो. एजाज खान (लुतरा शरीफ), मुशर्रफ खान (बिलासपुर), अब्दुल वहाब अशरफी (लुतरा शरीफ), हाजी अनवारूल हक (लुतरा शरीफ), हाजी अब्दुल करीम वेग (लुतरा शरीफ), अब्दुल शहनवाज मेमन (लुतरा शरीफ), शेख अब्दुल गफ्फार (लुतरा शरीफ) सहित बिलासपुर, कोरबा, बलौदा और लुतरा शरीफ के सदस्य शामिल हैं।
05 सितंबर / मंथन मित्तल





