कोरबा (मंथन) छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 26 और कोरबा राजस्व जिले के 28 साल के बाद भी जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के सिर्री पंचायत के छात्रों को विद्यालय जाने के लिए नदी पार करना पड़ रहा है। बारिश से लेकर ठंड के मौसम में उनके सामने यह स्थिति बनी रहती है। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें पढऩा है और इसके लिए वे इस तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैं। जबकि बच्चों की अभिभावकों की शिकायत है कि पूरे मामले की जानकारी पिछली से लेकर अगली सरकार और अधिकारियों को है लेकिन नदी पर पुल निर्माण करने की जरूरत नहीं समझी गई।
कोरबा जिले को भारत सरकार ने आकांक्षी श्रेणी में रखा है और इस पर योजनाओं के क्रियान्वयन और उनकी प्रगति को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कोरबा जिले में विकास के लिए न केवल सरकार पर्याप्त फंड दे रही है बल्कि जिला मिनरल्स फाउंडेशन के पास भी एक बड़ा बजट मौजूद है। इसके मौजूद ग्रामीण क्षेत्र के हालात वास्तविकता की चुगली करते हैं। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढऩे के बाद हालात और भी भयावह हो जाते हैं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित माता-पिता खुद नदी में उतरकर उन्हें पार करवाते हैं और स्कूल तक पहुंचाते हैं।
सिर्री पंचायत के ग्रामीणों ने बताया कि नदी में पानी बढ़ने के कारण विद्यालयीन छात्रों का विद्यालय पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। कई बार पानी का बहाव इतना तेज हो जाता है कि बच्चों के लिए नदी पार करना जोखिम भरा हो जाता है। बाढ़ की स्थिति अधिक गंभीर होने पर बच्चे कई-कई दिनों तक विद्यालय नहीं जा पाते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में स्थायी समाधान नहीं हो सका है। क्षेत्रीय विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम भी नदी पर पुल निर्माण की मांग उठा चुके हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों को अब तक राहत नहीं मिल सकी है। बरसात के दिनों में हर साल वही समस्या दोहराई जाती है और छात्रों को जोखिम उठाकर विद्यालय जाना पड़ता है। सरकार गांव-गांव तक शिक्षा और विकास की सुविधाएं पहुंचाने की बात करती है, लेकिन सिर्री पंचायत की यह तस्वीर सवाल करती है कि जब एक बच्चा विद्यालय जाने के लिए ही सुरक्षित रास्ते से वंचित हो, तो उसके शिक्षा के अधिकार और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है ? सिर्री पंचायत के ग्रामीण अब आश्वासन नहीं, बल्कि नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि बरसात में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और ग्रामीणों को भी आवागमन की इस गंभीर समस्या से स्थायी निजात मिल सके।
नदी पर पुल नहीं होने का असर केवल छात्रों की शिक्षा तक सीमित नहीं है। बारिश के मौसम में ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हो जाती है। राशन लेने, बाजार जाने, अस्पताल या अन्य जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने में ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
23 अगस्त / मंथन मित्तल





