* स्वच्छ ऊर्जा और सामुदायिक गतिविधियों की तैयारी
कोरबा (मंथन) कोयला खदानों के बंद होने के बाद उनके क्षेत्र को खाली छोड़ने के बजाय अब वैकल्पिक और सामुदायिक उपयोग में लाने की दिशा में जोर दिया जा रहा है। एसईसीएल ने ऐसी बंद खदानों के स्थलों पर स्वच्छ ऊर्जा, प्रशिक्षण, हरित क्षेत्र और सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई है।
इसी कड़ी में बांकी भूमिगत खदान क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्र, कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) संयंत्र और फलदार पौधों के रोपण जैसी गतिविधियों की योजना है। हाल ही में लागू कोलियरी नियंत्रण संशोधन नियम-2026 ने बंद खदानों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। नए प्रावधान के अनुसार यदि कोई कोयला खदान, कोयला परत या उसका कोई हिस्सा 180 दिन या उससे अधिक समय तक बंद रहा है, तो दोबारा खनन शुरू करने से पहले कोल कंट्रोलर आर्गेनाइजेशन (सीसीओ) की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नए नियमों में एक अहम बदलाव यह किया गया है कि बंद खदान से दोबारा खनन शुरू करने के मामले में पहले सीसीओ की पूर्व मंजूरी की व्यवस्था थी। अब निर्धारित प्रक्रिया के तहत खनन शुरू करने के बाद 15 दिनों के भीतर सीसीओ को इसकी सूचना देना होगा। वहीं, कोयला खदान या कोयला परत में खनन शुरू करने के अधिकार वाली कोल कंपनी के निदेशक मंडल की पूर्व मंजूरी की व्यवस्था लागू रहेगी।
* 54 खदानों की क्लोजर प्लान में पहचान
एसईसीएल ने माइन क्लोजर प्लान के तहत 54 खदानों की पहचान की है। इनमें वित्त वर्ष 2024-25 में तीन और 2025-26 में 25 खदानों को बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। वित्त वर्ष 2026-27 में 11 और 2027-28 में शेष 15 खदानों को बंद करने का लक्ष्य रखा गया है।
* बंद खदानों में बन रहीं सामुदायिक सुविधाएं
बांकी 7 एवं 8 भूमिगत खदान क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र और साप्ताहिक बाजार विकसित किया गया है। वहीं बांकी 5 एवं 6 भूमिगत खदान को सामुदायिक केंद्र के रूप में विकसित कर स्थानीय लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया है। रजगामार 8 एवं 9 भूमिगत खदानों के बंद होने के बाद वहां पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी काम किया गया है।
* कोयले के बाद हरित ऊर्जा की तैयारी
बांकी क्षेत्र में प्रस्तावित सीबीजी संयंत्र जैविक अपशिष्ट जैसे गोबर, कृषि अवशेष और गीले कचरे से बायोगैस तैयार कर उसे ईंधन के रूप में उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। इससे बंद खदान क्षेत्रों को स्वच्छ ऊर्जा और स्थानीय रोजगार से जोड़ने की संभावनाएं बनेंगी।
15 अगस्त / मंथन मित्तल





