* जगह-जगह हुई आरती और भंडारे
कोरबा (मंथन) कोरबा जिले में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। रथ यात्रा शहर के सीतामढ़ी स्थित प्राचीन राम-जानकी मंदिर से शुरू हुई। वहीं दादर बस्ती में भी 125 साल पुरानी परंपरा के तहत रथ यात्रा निकाली गई।
सीतामढ़ी के राम-जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद भगवान जगन्नाथ का रथ मंदिर परिसर से बाहर लाया गया। रथ चलते ही श्रद्धालुओं ने “जय जगन्नाथ” के जयकारे लगाए। रथ यात्रा में महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। रथ खींचने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। पूरे रास्ते भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
* जगह-जगह हुई आरती और भंडारे
यात्रा मार्ग में कई जगह श्रद्धालुओं ने रथ रोककर भगवान की आरती उतारी और फूल-माला अर्पित की। कई स्थानों पर भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया।
* करमा और मदार की थाप पर झूमे श्रद्धालु
रथ यात्रा के दौरान करमा और मदार की थाप पर युवा और महिलाएं नाचते-गाते चले। कई जगह जस गीतों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
* दादर बस्ती में निभाई गई 125 साल पुरानी परंपरा
कोरबा शहर से लगे दादर बस्ती में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 125 वर्षों की परंपरा के अनुसार निकाली गई। कोरबा शहर और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए। बुजुर्गों ने बताया कि यह यात्रा वर्षों से आस्था और आपसी भाईचारे का प्रतीक रही है।
* सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
रथ यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। सीतामढ़ी और दादर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। प्रमुख चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जवानों की ड्यूटी लगाई गई।
* आस्था और संस्कृति का संगम
भगवान जगन्नाथ की यह रथ यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कोरबा की सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। भक्ति, संगीत और सामुदायिक एकता के साथ यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया।
17 जुलाई / मंथन मित्तल



