* विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे ग्रामीणों में सचिव के प्रति भारी आक्रोश
कोरबा (मंथन) कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सेन्द्रीपाली के ग्रामीणों में सरपंच सचिव के प्रति काफी आक्रोश देखा जा रहा है। आरोप लगाते हुए बताया जा रहा हैं कि ग्राम में अनेक तरह की समस्याएं व्याप्त हैं और सरपंच, सचिव के पास शिकायत करने के बावजूद उनके द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों का आगे आरोप है कि सरपंच और सचिव ग्राम की गलियों में कभी झांकने तक नहीं आते। ग्रामीण किस हाल में रह रहे हैं उनकी क्या-क्या समस्याएं हैं इससे उन दोनों को कोई लेना-देना नहीं है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए आगे बताया कि ग्राम में कई तालाब है जिसमें जलकुंभियों और कूड़े कचरे का अंबार लगा है। वहां का पानी इतना बदबूदार है कि उपयोग करने में बीमारियों का भय बना रहता है। कई तालाब में पचरी निर्माण भी नहीं हुआ है और जहां पचरी है उसकी हालत काफी जर्जर हो चुकी है।
बरसों पहले सड़क निर्माण हुआ था जो अब काफी जीर्णशीर्ण हो गया है। इसकी मरम्मत की बहुत आवश्यकता है इसके अलावा ग्राम में नई सड़क के निर्माण की भी जरूरत है। घरों से निकले गंदे पानी की निकासी के लिए गांव में नाली ही नहीं हैं। बार-बार की शिकायत के बाद नाली का निर्माण कार्य शुरू हुआ था लेकिन उसे आधा अधूरा ही छोड़ दिया गया। जो थोड़ा बहुत निर्माण हुआ था वह भी अब टूट चुका है।
आरोप लगाते हुए आगे कहा की स्वच्छ भारत अभियान के तहत केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में घर-घर शौचालय निर्माण की भी योजना थी, लेकिन आज पर्यंत तक ग्राम के सभी ग्रामीणों को शौचालय की सुविधा नहीं मिली है। कुछ लोगों ने अपने निजी पैसों से शौचालय का निर्माण किया है तो कुछ आज भी शौच के लिए बाहर जाने को मजबूर हैं। गांव में दो सबसे बड़ी समस्या पेयजल की कमी और खुलेआम अवैध मादक द्रव्य पदार्थ की बिक्री होती है। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल कनेक्शन देने की योजना थी। कनेक्शन तो पहुंच गए लेकिन पानी आपूर्ति नहीं हो रही है।
ग्राम के प्राचीन कुएं या तो सुख गए हैं या फिर वो कूड़े कचरे से पट गया है। यही एक मात्र छोटा सा कुआं है जहां के पानी को ग्रामीण निस्तारी के लिए उपयोग करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नालियों का गंदा पानी रिसते हुए कुएं तक पहुंच रहा है इसलिए इस कुएं का पानी भी दूषित हो चुका है यानी इसमें का पानी पीने योग्य नहीं है।
बताया जा रहा हैं की ग्राम की सारी समस्याओं के बारे में सरपंच और सचिव भली भांति जानते हैं लेकिन उनके द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती। इन दोनों के कारण गांव का विकास थम सा गया है। इन ग्रामीणों ने एक बड़ा आरोप ये भी लगाया है कि क्षेत्रीय पत्रकारों की संख्या काफी ज्यादा है, जो केवल अवैध वसूली में लगे रहते हैं। वे सरपंच सचिवों के साथ सेटिंग करके चलते हैं इसीलिए वे गांव की समस्याओं को सामने नहीं लाते। उन्होंने अब अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
13 जुलाई / मंथन मित्तल



