कोरबा (मंथन) छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से राज्य विधिज्ञ परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट-मुलाकात कर 12 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री ने उन्हें शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया।
जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद (स्टेट बार काउंसिल ऑफ छत्तीसगढ़) के अध्यक्ष, संघ के सदस्य रविन्द्र कुमार पाराशर के नेतृत्व में परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके निवास कार्यालय में भेंट-मुलाकात कर प्रदेश के अधिवक्ताओं के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा व पेशागत सुविधाओं से संबंधित 12 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा कर ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में परिषद के उपाध्यक्ष विराट वर्मा, कोषाध्यक्ष नरेन्द्र सोनी, बार काउंसिल ऑफ इंडिया सदस्य शैलेन्द्र दुबे, कार्यकारी उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता, परिषद सदस्य शत्रुहन सिंह साहू, प्रभाकर चंदेल, भास्कर साहू, गणेश राम गुजराल, फैसल रिजवी, ब्रजेशनाथ पाण्डेय, विवेकानंद भोई, रूपेश त्रिवेदी, प्रशांत तिवारी, रवि राजपूत, चंद्रप्रकाश जांगड़े, संतोष वर्मा, सचिव अमित वर्मा, दीपक ठाकुर, टीकाराम साहू की उपस्थिति में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ में लगभग 36 हजार अधिवक्ता न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कार्य कर रहे हैं, किंतु उनके कल्याण व सामाजिक सुरक्षा के लिए अनेक आवश्यक योजनाओं और सुविधाओं का अभाव है।
इस संबंध में राज्य विधिज्ञ परिषद द्वारा तैयार मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा गया। ज्ञापन में प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने, अधिवक्ता मृत्यु सहायता राशि में वृद्धि, परिषद के संचालन एवं कल्याणकारी योजनाओं के लिए विशेष बजट प्रावधान, लाइब्रेरी अकादमी भवन निर्माण हेतु राशि स्वीकृति, जिला एवं तहसील अधिवक्ता संघों में मूलभूत सुविधाओं का विकास, अधिवक्ताओं के लिए सामूहिक बीमा योजना, नियमित प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों हेतु वार्षिक अनुदान, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना, नव नामांकित अधिवक्ताओं के लिए छात्रवृत्ति सहायता, अधिवक्ताओं को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा तथा टोल टैक्स में छूट प्रदान करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं की समाज मे अहम भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अधिवक्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत मांगों को गंभीरता से सुना तथा अधिवक्ताओं के हित से जुड़े विषयों पर सकारात्मक पहल करते हुए संबंधित विभागों से परीक्षण एवं आवश्यक कार्यवाही कराने का आश्वासन दिया।
श्री पाराशर ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़ी इन मांगों के पूर्ण होने से प्रदेश के अधिवक्ताओं को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्राप्त होगी, साथ ही न्यायिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने में सहायता मिलेगी। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासन के परिणामस्वरूप अधिवक्ताओं की लंबे समय से लंबित मांगों के निराकरण की दिशा में शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएंगे।
17 जून / मंथन मित्तल



