कोरबा (मंथन) कोरबा-पश्चिम की आवासीय कॉलोनी में हसदेव ताप विद्युत गृह (एचटीपीएस), प्रकृति और लोकपरंपरा से जुड़े करमा पर्व को श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। मंगल भवन में आयोजित करमा पूजा के दौरान करम सेमी डार की विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि, खुशहाली तथा परिवार और संस्थान की उन्नति की कामना की गई। पूजा-अर्चना के बाद मांदर की थाप पर करमा नृत्य ने पूरे परिसर को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया।
भादो माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक एच.के. सिंह एवं रुक्मणी सिंह तथा विशिष्ट अतिथि कारखाना प्रबंधक ए.के. शाह एवं विजया शाह शामिल हुए। अतिथियों ने करम सेमी डार की विधिवत पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान एचटीपीएस कॉलोनी के अधिकारी-कर्मचारी, उनके परिवारजन और बड़ी संख्या में कॉलोनीवासी उपस्थित रहे।
करमा पूजा के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों के बीच लोगों ने उत्साहपूर्वक करमा नृत्य किया। वनवासी कन्या छात्रावास की छात्राओं ने छत्तीसगढ़ी गीतों पर आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों की खूब सराहना बटोरी। कार्यक्रम के दौरान कार्यपालक निदेशक एचके सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए करमा पर्व की लोक-सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का आयोजन सर्व समाज करमा महोत्सव समिति द्वारा किया गया। करमा पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक माना जाता है। एचटीपीएस परिसर में आयोजित इस आयोजन ने पारंपरिक लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का संदेश दिया।
रातभर चले करमा नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद करम सेमी डार का कैलाश विहार स्थित सरोवर में विधिवत विसर्जन किया गया। आयोजन को सफल बनाने में सर्व समाज करमा महोत्सव समिति के संरक्षक पंचम लाल राठौर, अध्यक्ष अरुण दास वैष्णव, उपाध्यक्ष केके गौतम, नत्थू लाल यादव, कृष्णा जगत, समेलाल गोंड, शिव चरण साहू, बाबूलाल चंद्रा, सचिव दुखुराम साहू, उपसचिव राम लखन राठौर, कोषाध्यक्ष रामधन राठौर, उप कोषाध्यक्ष कुमार सिंह सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों एवं सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। करमा पर्व के अवसर पर एचटीपीएस कॉलोनी में देर रात तक उत्सव का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने पारंपरिक संस्कृति से जुड़कर पर्व की खुशियां साझा कीं।
24 सितंबर / मंथन मित्तल





