कोरबा (मंथन) कारगिल युद्ध में शामिल रहे पूर्व सैनिक से रांची के एक टोल प्लाजा में साझेदारी दिलाने के नाम पर ₹34.40 लाख की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा हैं।
शिकायत के आधार पर झारखंड के नगड़ी थाना पुलिस ने कोरबा के सराफा व्यवसायी, उसके साले, टोल मैनेजर तथा अन्य अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता जो कोरबा जिले का दर्री निवासी एवं पूर्व सैनिक हैं, ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि एक संस्थान में लेन-देन के दौरान उनकी पहचान कथित आरोपियों से हुई। दोनों ने स्वयं को झारखंड में टोल प्लाजा संचालन से जुड़ा बताते हुए रांची के नगड़ी थाना क्षेत्र स्थित पतरा चौली टोल प्लाजा में साझेदारी का प्रस्ताव दिया।
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें टोल प्लाजा का टेंडर मिला है और धनाभाव के कारण वे इसे पार्टनरशिप पर संचालित कराना चाहते हैं। टेंडर से जुड़े दस्तावेज और स्क्रीनशॉट दिखाकर व्यवसाय को लाभदायक बताया गया। इसके बाद प्रार्थी को रांची ले जाकर टोल प्लाजा दिखाया गया और निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
आवेदन में आरोप लगाते हुए कहा गया है कि अगस्त 2025 से विभिन्न किस्तों में नकद और बैंक खातों के जरिए कुल ₹34.40 लाख लिए गए। शिकायतकर्ता ने बैंक लेन-देन और अन्य दस्तावेज पुलिस को सौंपने का दावा किया है।
शिकायत के अनुसार बाद में ₹100 के स्टांप पेपर पर एक अनुबंध किया गया, जिसमें टोल प्लाजा के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी प्रार्थी को देने का उल्लेख था। शिकायतकर्ता का कहना है कि एलओए मिलने के बाद 19 सितंबर 2025 से उनके कर्मचारियों ने टोल प्लाजा का संचालन भी शुरू कर दिया था।
पूर्व सैनिक का आरोप है कि कुछ महीनों बाद टोल की आय बढ़ने पर उन लोगो के द्वारा उनके कर्मचारियों को धमकाकर भगा दिया और टोल संचालन अपने कब्जे में ले लिया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप से हटा दिया गया और कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी दी गईं।
शिकायतकर्ता के अनुसार बाद में जब वे एनएचएआई के रांची कार्यालय पहुंचे तो अधिकारियों ने बताया कि टोल प्लाजा को पार्टनरशिप या सबलेट पर देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद उन्हें कथित धोखाधड़ी का संदेह हुआ।
आवेदन के आधार पर नगड़ी थाना में कांड क्रमांक 126/2026 25 जुलाई 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 316(1), 318(4), 126(2), 115(2), 303(2), 351(2), 351(3) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही हैं।
29 जुलाई / मंथन मित्तल



