* भारत पशुधन पोर्टल पर पंजीयन के साथ नसबंदी और टीकाकरण का भी रहेगा डिजिटल रिकॉर्ड
कोरबा (मंथन) कोरबा शहरों की सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशु और श्वान अब सिर्फ सड़क पर दिखाई देने वाले जानवर नहीं रहेंगे, बल्कि उनका शासकीय रिकॉर्ड तैयार होगा। राज्य के नगरीय क्षेत्रों में आवारा पशुओं और आवारा श्वानो के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए केंद्र सरकार ने भारत पशुधन पोर्टल तैयार किया है। अब नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र में घूम रहे आवारा पशुओं का पंजीयन इसी पोर्टल पर कराना होगा।
केवल पशुओं की संख्या दर्ज करने तक यह व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी। पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत तैयार किए गए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटरों की मैपिंग भी पोर्टल पर की जाएगी। नसबंदी और टीकाकरण की गई कार्रवाई की जानकारी भी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। योजना का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा एबीसी सेंटरों की मैपिंग है। पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के तहत तैयार किए गए सेंटरों की लोकेशन और संबंधित जानकारी भारत पशुधन पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इसके लिए नगरीय निकायों को जिला पशु चिकित्सक से समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के साथ पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से लागू करना है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शहरों में आवारा पशुओं से संबंधित जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेगी। नगरीय निकायों को योजना बनाने में आसानी होगी। किस क्षेत्र में आवारा पशुओं की संख्या अधिक है, कहां सेंटर की जरूरत है और कितने पशुओं की नसबंदी अथवा टीकाकरण किया जा चुका है, इसकी जानकारी रिकॉर्ड के आधार पर जुटाई जा सकेगी।
सरकार के निर्देश के मुताबिक शहरों में घूम रहे आवारा पशुओं का रजिस्ट्रेशन वेरिफायर के माध्यम से भारत पशुधन पोर्टल पर किया जाएगा। इसके लिए नगरीय निकायों को अपने क्षेत्र में मौजूद आवारा पशुओं की पहचान कर उनका पंजीयन सुनिश्चित करना होगा। इससे अलग-अलग शहरों में आवारा पशुओं की वास्तविक संख्या का आंकड़ा तैयार करने में मदद मिलेगी। अभी कई जगह आवारा पशुओं की संख्या का आंकड़ा अनुमान के आधार पर सामने आता है। ऐसे में पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद पहली बार एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार होने की संभावना है।
सरकार ने 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक की गई नसबंदी और टीकाकरण संबंधी कार्यवाही की जानकारी भी भारत पशुधन पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यानी इस अवधि में जिन आवारा पशुओं की सैनेटाइज व वैक्सीनेशन की कार्यवाही की गई है, उसका रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे नसबंदी और टीकाकरण के काम में सिर्फ कागजी आंकड़ों पर निर्भरता कम होगी और कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। कार्यक्रम की प्रगति का आंकलन किया जा सकेगा।
10 सितंबर / मंथन मित्तल





