कोरबा (मंथन) “कोरबा रेलवे स्टेशन के सेकेंड एंट्री पर डस्ट बड़ी समस्या है। एसईसीएल मानिकपुर प्रबंधन की ओर से कोल साइडिंग पर लगातार पानी छिड़काव किया जाता है। कोल साइडिंग अभी बंद नहीं होगी। डस्ट रोकना है, तो भारी वाहनों को रोकने की दिशा में प्रयास करना होगा। मानिकपुर प्रबंधन साइलो निर्माण में जुटा हुआ है। काम पूरा होने पर स्टेशन से कोल साइडिंग भी हट जाएगी, लेकिन इसमें कितना समय लगेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी।”
उक्त कथन दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल के अतिरिक्त मंडल प्रबंधक (एडीआरएम) श्रीनिवास ने कोरबा दौरे पर स्टेशन निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने यात्री हित, ट्रेनों के विस्तार, नई ट्रेनों से जुड़ी मांगों को सुना। पिछले दो साल से हसदेव एक्सप्रेस का दुर्ग तक विस्तार करने की मांग पर एडीआरएम ने बताया कि दुर्ग के पिट यार्ड में कोचिंग ट्रेनों का काफी दबाव है। इसलिए वहां तक गाड़ी का विस्तार करने इंतजार करना होगा। दोनों डिवीजन के परिचालन विभाग से मिलकर कोई न कोई रास्ता तलाशने की बात कही।
ग्राम उरगा से कोरबा के बीच यात्री ट्रेन बढ़ाने के सवाल पर बताया कि एक कोचिंग ट्रेन चलाने पर चार मालगाड़ी का फेरा प्रभावित होगा। बायपास पर अधिक से अधिक मालगाड़ी कैसे चलायी जा सकती है, इसकी रूपरेखा तय करने अधिकारियों से कहा। एडीआरएम ने कहा कि पिटलाइन पूरी क्षमता के साथ उपयोग करने के योग्य नहीं है। सबसे बड़ी समस्या मेन पावर की है। भविष्य में पिटलाइन को शुरू करने की योजना है। उन्होंने गेवरा-पेंड्रा रोड रेल कॉरिडोर के साल के अंत तक पूरा होने की बात कही। प्लेटफार्म-1 के गेट की ऊंचाई बढ़ाने मांगा प्रस्ताव अमृत भारत के तहत स्टेशन में चल रहे काम के चलते प्लेटफार्म नंबर 2-3 की स्थिति देखकर वे काफी नाराज हुए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ठेकेदार से कहकर कामगारों की संख्या बढ़ाएं, जिससे यात्रियों को असुविधा से बचाया जा सके। उन्होंने प्लेटफार्म-1 के मुख्य गेट की ऊंचाई बढ़ाने प्रस्ताव बनाकर देने कहा।
14 अप्रैल / मंथन मित्तल



