* वेदांता को बताया राष्ट्रीय संपत्ति
कोरबा (मंथन) कोरबा जिले के समीपवर्ती सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता थर्मल पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में पुलिस और प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट हेड देवेन्द्र पटेल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ डभरा थाने में एफआईआर दर्ज कर ली है।
तद्पश्चात वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के समर्थन में उठने वाली आवाजें अब और बुलंद होती जा रही हैं। लोकसभा सांसद और जिंदल स्टील के चेयरमैन नवीन जिंदल छत्तीसगढ़ के सक्ति जिले के सिंघीतराई बॉयलर ब्लास्ट मामले में अनिल अग्रवाल के खिलाफ दर्ज एफआईआर को सार्वजनिक रूप से चुनौती देने वाले पहले प्रमुख व्यक्ति बने। बताया जा रहा हैं की अब पूर्व उपराज्यपाल और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी डॉ. किरण बेदी ने भी इस मुहिम में अपनी आवाज जोड़ दी है। उन्होंने वेदांता को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए सार्वजनिक निर्णयों में संयम बरतने अपील की है। पद्म भूषण से सम्मानित, पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी ने संगठन के अपने प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर समर्थन में कदम रखा।
उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि “हाल ही में इस विशाल संगठन का दौरा करने के बाद मैंने देखा कि प्रत्येक व्यक्ति सुरक्षा और प्रशिक्षण के प्रति कितना समर्पित था। वेदांता एक नवरत्न है। एक राष्ट्रीय संपत्ति। हमें अपने दृष्टिकोण में बहुत सावधान रहना चाहिए। जांच से सीखे जाने वाले सबक और बेहतर सुरक्षा उपाय सामने आएंगे। अपने निर्णयों और बयानों में अत्यंत संवेदनशील रहें। इसका पूरे देश पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है।”
डॉ. बेदी का यह समर्थन इस बात का संकेत माना जा रहा हैं कि उचित प्रक्रिया और निष्पक्ष व्यवहार की चिंता अब केवल व्यापारिक जगत तक सीमित नहीं रही, यह कानून प्रवर्तन, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन की प्रमुख हस्तियों के बीच भी गूंज रही है।
उल्लेखनीय हैं कि 23 मृतकों के परिजनों को चेक और ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से मुआवजे का वितरण पहले ही शुरू हो चुका है। कंपनी परिवारों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चेक सीधे उनके हाथों में पहुंचें। नवीन जिंदल इस मामले में सबसे पहले सामने आए और उन्होंने एक कड़े एवं स्पष्ट बयान में उचित प्रक्रिया तथा इस त्रासदी के प्रबंधन के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। इस त्रासदी का उल्लेख करते हुए श्री जिंदल ने कहा था कि “छत्तीसगढ़ की यह त्रासदी अत्यंत पीड़ादायक है। उन परिवारों ने सब कुछ खो दिया है। प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा, आजीविका सहायता और गहन जांच ये सभी अनिवार्य हैं। साथ ही, उन्होंने तथ्यों के स्थापित होने से पहले श्री अग्रवाल का नाम एफआईआर में शामिल किए जाने के निर्णय पर कड़े सवाल उठाए कि “किसी भी जांच से पहले वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम एफआईआर में डालना गंभीर चिंताएं पैदा करता है। वे एक साधारण और पिछड़े समुदाय की पृष्ठभूमि से उठकर अपने दम पर एक वैश्विक उद्यम खड़ा करने वाले व्यक्ति हैं। उस प्लांट के संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।”
विभिन्न क्षेत्रों में अपनाए जा रहे मानकों की असंगति को रेखांकित करते हुए श्री जिंदल ने कहा की जब पीएसयू प्लांट्स या रेलवे में हादसे होते हैं, तो क्या हम चेयरमैन का नाम लेते हैं ? नहीं लेते। यही मानक निजी क्षेत्र पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने आगे उचित प्रक्रिया के महत्व पर जोर दिया की पहले जांच कीजिए। साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कीजिए। उसके बाद कार्यवाही कीजिए।
इस मुद्दे को देश की व्यापक आर्थिक दृष्टि से जोड़ते हुए उन्होंने कहा की “भारत के #ViksitBharat विजन को आगे बढ़ाने के लिए अनिल अग्रवाल जैसे लोगों की जरूरत है, जो निवेश करें और निर्माण करें। यह तभी संभव है जब निवेशकों को व्यवस्था पर भरोसा हो।”
दो प्रमुख राष्ट्रीय हस्तियों के सामने आने के बाद, निष्पक्ष जांच और पूर्वाग्रही निर्णयों से परहेज की मांग अब तेजी से जोर पकड़ रही है और उद्योग संगठनों तथा संस्थाओं पर जवाब देने का दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है।
19 अप्रैल / मंथन मित्तल



