कोरबा (मंथन) एसईसीएल परियोजना विस्तार के कारण भू-विस्थापित हुए ग्राम बुड़बुड़ के बच्चों को आज भी शिक्षा और सुरक्षा के अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों में इस बदहाली को लेकर भारी नाराजगी जताई है। आरोप लगाते हुए कहा जा रहा हैं की जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से प्राथमिक शाला 15 लाख और पूर्व माध्यमिक शाला15.85 लाख के लिए राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद विद्यालय भवनों में किचन, अहाता और दरवाजे की कुंडी जैसे आवश्यक निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। टाइल्स की गुणवत्ता भी बेहद खराब है।
* कपड़े को घेरा कर बनाया गया अस्थाई शौचालय
विद्यालय में शौचालय की उचित सुविधा न होने के कारण शिक्षकों को कपड़े का घेरा बनाकर अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी है। इससे छात्राओं और छोटे बच्चों को भारी संकोच और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राथमिक शाला ग्राम से लगभग एक किलोमीटर दूर, सुनसान रास्ते और घने जंगल के किनारे स्थित है। विद्यालय का कार्यालय भी असुरक्षित है और बाउंड्री वॉल न होने के कारण अभिभावक हमेशा बच्चों की सुरक्षा को लेकर डरे रहते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि विस्थापन के समय एसईसीएल द्वारा मूलभूत सुविधाएं देने का वादा किया गया था, जो आज तक अधूरा है। उन्होंने जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कराई जाए, अधूरे कार्यों को जल्द पूरा किया जाए और बच्चों की शिक्षा व सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
24 जून / मंथन मित्तल



