कोरबा (मंथन) बारिश में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने की आंशका के बीच एचटीपीपी व डीएसपीएम पावर प्लांट ने कोयले का स्टॉक बढ़ा दिया है। एचटीपीपी पावर प्लांट में कोयले के भरपूर स्टॉक की एक बड़ी वजह लगभग दो महीने से संयंत्र की दो इकाइयों में उत्पादन नहीं होना भी है। इससे संयंत्र में कोयले की खपत में कमी आई है। गुरुवार की स्थिति में एचटीपीपी संयंत्र में 48 दिन का कोयला संग्रहित हैं।
कोरबा जिले में मानसून करीब ही है। बारिश के कारण संयंत्रों में खदानों से मालगाड़ी व कन्वेयर बेल्ट के जरिए कोयले की आपूर्ति प्रभावित होती है। खदानों में बारिश के कारण भारी मशीनें नहीं चलने से कोयला उत्पादन पर असर पड़ता है। पिछले साल एचटीपीपी संयंत्र में कुसमुंडा खदान से कन्वेयर बेल्ट के जरिए कोयले की आपूर्ति पर असर पड़ा था। इससे संयंत्र में कोयले का भंडार क्रिटिकल स्टेज पर आ गया था। मानसून से पहले एसईसीएल के साथ समन्वय बना एचटीपीपी संयंत्र में कुसमुंडा खदान से आपूर्ति बढ़ाने पर प्रबंधन सफल रहा है। संयंत्र में कोयले की हो रही आपूर्ति से 1 हजार टन कम खपत हो रही है।
जानकारी के अनुसार डीएसपीएम प्लांट के कोल भंडारण से 53 दिन की जरूरत पूरी की जा सकती है। 250 मेगावाट की दो यूनिट से बिजली उत्पादन किया जा रहा है। एसईसीएल की मानिकपुर खदान से कोयले की आपूर्ति संयंत्र तक रेल मार्ग से है। डीएसपीएम व मड़वा पावर प्लांट ने अपने अभी के लक्ष्य से ज्यादा बिजली उत्पादन की है। वहीं एचटीपीपी पावर प्लांट में कोयले की बराबर आपूर्ति से भंडारण बढ़ाने के बावजूद 1400 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन करने में सफल रही है। जबकि 1949 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन करना था।
13 जून / मंथन मित्तल



