* क्षेत्रीय असंतुलन का आरोप लगा बढ़ा असंतोष
कोरबा (मंथन) जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की नई जिला कार्यकारिणी घोषित होते ही संगठन के भीतर असंतोष की चिंगारी सुलगती नजर आ रही है। 65 पदाधिकारियों की सूची जारी होने के बाद सबसे बड़ा विवाद क्षेत्रीय असंतुलन और कथित ‘आयातित नेतृत्व’ को लेकर खड़ा हो गया है। अंदर ही अंदर चल रही चर्चा अब खुलकर सामने आने लगी है और कई कार्यकर्ता चयन प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
* कोरबा का दबदबा, बाकी विधानसभा क्षेत्रों में नाराजगी
घोषित सूची के आंकड़ों पर नजर डालें तो 65 में से 40 पदाधिकारी केवल कोरबा विधानसभा क्षेत्र से शामिल किए गए हैं। इसके मुकाबले पाली-तानाखार विधानसभा से सिर्फ 3, रामपुर से 9, कटघोरा से 13, महिलाओं को स्थान मिला है। संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि इतना बड़ा जिला होने के बावजूद कार्यकारिणी एक ही क्षेत्र तक सीमित नजर आ रही है, जिससे दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में असंतोष बढ़ रहा है।
* आदिवासी क्षेत्रों की अनदेखी पर सवाल
पाली-तानाखार और रामपुर दोनों ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं। पाली-तानाखार में वर्तमान में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के विधायक है। जबकि रामपुर में कांग्रेस का कब्जा है राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जहां संगठन कमजोर है, वहीं प्रतिनिधित्व कम देना रणनीतिक भूल साबित हो सकती है।
* जिलाध्यक्ष के लिए बढ़ी मुश्किल
महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को साधने की मानी जा रही है। संगठन के भीतर यह भी चर्चा है कि यदि जल्द संतुलन नहीं बनाया गया तो इसका असर आने वाले चुनावों में दिखाई दे सकता है।
* महामंत्री नियुक्ति पर भी उठे सवाल
जिला महामंत्री पद पर नियुक्त महिला को लेकर भी संगठन के भीतर फुसफुसाहट तेज है। बताया जा रहा है कि वे पहले भाजपा चुनाव के दौरान सक्रिय भूमिका में नहीं थीं। ऐसे में सीधे महत्वपूर्ण पद मिलना कई पुराने कार्यकर्ताओं को रास नहीं आ रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संगठन में अब जमीनी कार्यकर्ताओं की जगह बाहर से आए लोगों को तरजीह मिलने की शिकायत बढ़ रही है।
29 मार्च / मंथन मित्तल



