कोरबा (मंथन) न्यू रेलवे कॉलोनी बनने पर यहां रहने वाले रेल अधिकारी व कर्मचारियों के लिए समपार फाटक आवागमन के लिए बेहतर विकल्प था। गुड्स ट्रेनों के बढ़ते दबाव व दुर्घटना की आशंका को देख रेल प्रशासन ने उसे स्थाई रूप से बंद कर दिया हैं।
फाटक बंद हुए करीब 3 साल से अधिक समय हो गया है। तब से स्टेशन में ड्यूटी करने व ड्यूटी से घर जाने वाले अधिकारी/कर्मचारी को 3 किमी घूमकर कोल साइडिंग के बीच से आवागमन करने मजबूर होना पड़ रहा है। एसईसीआर मजदूर कांग्रेस यूनियन की वेलफेयर टीम ने बंद किए गए समपार फाटक पर अंडरपास बनाने मांग कर रही है। यूनियन की इस मांग के बाद रेल प्रबंधन की एक टीम मौके पर आकर सर्वे कार्य कर चुकी है। सर्वे रिपोर्ट में क्या बताया गया है, उसके आधार पर अंडरपास बनेगा या नहीं, इसका इंतजार है।
300 रेल कर्मचारी और उनका परिवार है परेशान समपार फाटक बंद होने से न्यू रेलवे कॉलोनी में रहने वाले 300 रेल कर्मियों के साथ उनके परिजन सबसे अधिक परेशान हैं, क्योंकि सर्वाधिक आवागमन इन्हीं लोग करते थे। रेल कर्मचारी व अधिकारी को दिन हो या रात, इस मार्ग से आने-जाने में किसी तरह की परेशानी भी नहीं होती थी, लेकिन अब उन्हें जिस मार्ग से आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, वह मार्ग पूरी तरह से जोखिम भरा है। खासकर रात के समय तो उक्त मार्ग आवागमन के योग्य है ही नहीं। कोल साइडिंग पर कोयला लेकर दौड़ने वाले भारी वाहनों के बीच से आना-जाना पड़ता है। या फिर अतिरिक्त 2 किलोमीटर घूमकर आना पड़ता है।
04 मई / मंथन मित्तल



