* जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से जांच की मांग
कोरबा ( मंथन) एक ओर जहां पूरा प्रदेश भीषण गर्मी और उमस की चपेट में है, वहीं दूसरी ओर छात्रों के भविष्य को संवारने का दम भरने वाले नामी शिक्षण संस्थान छात्रों की बुनियादी सहूलियतें तक छीन रही हैं। ऐसा ही एक असंवेदनशील मामला कोरबा-पश्चिम क्षेत्र के एक विद्यालय से सामने आया है, जहां विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण बोर्ड परीक्षा दे रहे मासूम छात्र दो घंटे तक गर्मी और उमस में बैठने को मजबूर रहे।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय में छात्रों के सेकंड बोर्ड एग्जाम आयोजित किए गए थे। परीक्षा के बेहद महत्वपूर्ण और तनावपूर्ण माहौल के बीच अचानक विद्यालय की बत्ती गुल हो गई। लगभग 2 घंटे तक बिजली न होने के कारण परीक्षा कक्ष किसी भट्ठी की तरह तपने लगे। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े और प्रतिष्ठित विद्यालय के पास बिजली कटने की स्थिति में जेनरेटर या वैकल्पिक पंखों/कूलर की कोई व्यवस्था नहीं थी।
परीक्षा देने पहुंचे छात्र-छात्राएं इस भीषण उमस में पसीने से तर-बतर होते रहे। गर्मी और घुटन के कारण कई बच्चों का ध्यान परीक्षा से भटकता रहा। परिजनों का आरोप है कि परीक्षा जैसी संवेदनशील घड़ी में छात्रों को ऐसा माहौल देना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। भारी-भरकम फीस वसूलने वाला विद्यालय प्रबंधन छात्रों को एक पंखा तक नसीब नहीं करा पा रहा है।
नागरिकों और पीड़ित अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने मांग की है। आखिर जब विद्यालय प्रबंधन के पास आपातकालीन बिजली बैकअप की व्यवस्था नहीं है, तो वे इतनी कड़कड़ाती धूप और गर्मी में विद्यालय का संचालन कैसे कर रहे हैं ? छात्रों की इस परेशानी को आखिर कब तक अनदेखा किया जाएगा ?
22 मई / मंथन मित्तल



