कोरबा (मंथन) सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित एवं संचालित खुले मुहाने की कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल प्रबंधन पर वादा-खिलाफी का आरोप लगाते हुए भू-विस्थापितों ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यालय में डेरा डालकर उन्होंने आवाज बुलंद की है। मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
आंदोलन में शामिल प्रभावितों ने बताया कि एसईसीएल कोरबा व कुसमुंडा क्षेत्र के भू-विस्थापित अर्जित भूमि के एवज में रोजगार की मांग के लिए पिछले कई वर्षों से क्षेत्रीय महाप्रबंधक और मुख्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। इनका निराकरण आज तक नहीं किया गया है। कोरबा क्षेत्र के पीड़ित भू-विस्थापितों के द्वारा उच्च न्यायालय द्वारा इस संबंध में रिट पिटीशन दायर किया गया था। इसके संबंध में उच्च न्यायालय बिलासपुर के द्वारा गत वर्ष 15 जनवरी 2025 को आदेश पारित कर 45 दिन के भीतर रोजगार देने को कहा गया था। पारित आदेश के संबंध में एसईसीएल के द्वारा डिविजनल बेंच में अपील प्रस्तुत की गई। जहां अपील खारिज हो गई। भू-विस्थापितों ने कहा कि इसके बाद उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने के बजाय कंपनी के द्वारा भू-विस्थापितों को रोजगार देने के नाम पर केवल झूठा आश्वासन देकर गुमराह किया जा रहा है। कई बार आंदोलन के बाद 29 जनवरी को लिखित आश्वासन प्रदान किया गया था कि 10 फरवरी तक निर्णय लेकर अवगत कराया जाएगा। मुख्यालय जाकर 11 फरवरी को निर्णय के संबंध में जानकारी राजस्व विभाग से प्राप्त करने पर टालमटोल व गुमराह करने वाला जवाब प्रस्तुत किया गया। जिससे नाराज होकर भू-विस्थापितों ने कार्यालय के बाहर गेट के पास 11 फरवरी से डेरा डाल दिया है। भू-विस्थापितों का कहना है कि रोजगार के संबंध में सकारात्मक निर्णय आने तक बाहर इंतजार करेंगे। पिछले 5 दिनों से खुले आसमान में रहकर निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान मुख्यालय के भूराजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा लिखित में कार्रवाई करने का आश्वासन प्रदान किया था। भूविस्थापित लगातार गुमराह होने से त्रस्त होकर उग्र आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं।
18 फरवरी / मंथन मित्तल



