* बिना अनुभव वाले विशेषज्ञ चिकित्सको की ई 2 ग्रेड से होगी सीधी भर्ती
कोरबा (मंथन) कोल इंडिया लिमिटेड ने अधिकारी भर्ती और प्रमोशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। जारी आदेश में सबसे बड़ी राहत चिकित्सा संवर्ग को दी गई है। अब जीडीएमओ और बिना अनुभव वाले विशेषज्ञ चिकित्सको की सीधी भर्ती ई 2 ग्रेड से होगी। तीन साल अनुभव वाले विशेषज्ञ सीधे ई 3 बनेंगे। इससे एसईसीएल के चिकित्सालयो में चिकित्सको की कमी दूर होने की उम्मीद है। गैर-चिकित्सा संवर्ग में एंट्री अब ई 1 से होगी। यह आदेश 23 मार्च के बाद की भर्तियों पर लागू होगा।
कोल इंडिया ने अधिकारी संवर्ग की भर्ती, पदोन्नति और वेतन संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। जारी आदेश के अनुसार प्रवेश स्तर के ग्रेड में संशोधन किया गया है। चिकित्सा को छोड़ अन्य सभी संवर्गों में अब ई-1 ग्रेड पर नियुक्ति होगी, जिसका वेतनमान 60,000 से 1,80,000 रुपए निर्धारित किया गया है। वहीं चिकित्सा क्षेत्र में जीडीएमओ और विशेषज्ञों की नियुक्ति ई-2 और ई-3 ग्रेड में होगी, जिनका वेतनमान 70,000 से 2,20,000 रुपए तक रहेगा। वहीं गैर-चिकित्सा संवर्ग के पदनामों में भी बदलाव किया गया है। पहले वर्ष में प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रबंधन प्रशिक्षु कहा जाएगा, जबकि दूसरे वर्ष से उन्हें अधिकारी के रूप में नामित किया जाएगा। ई-2 ग्रेड में कार्यरत अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारी का पदनाम दिया जाएगा। पदोन्नति के लिए न्यूनतम सेवा अवधि भी तय की गई है। ई-1 से ई-2 ग्रेड में पदोन्नति के लिए अधिकारियों को कम से कम तीन वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी, जिसमें प्रशिक्षण अवधि भी शामिल होगी। वहीं ई-2 से ई-3 में पदोन्नति के लिए भी तीन वर्ष की सेवा अनिवार्य होगी। कोल इंडिया ने कैडर स्कीम में भी परिवर्तन किए हैं। माइनिंग संवर्ग में अब पदोन्नति के लिए सेकेंड क्लास माइन मैनेजर सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया है, जो ओपनकास्ट और अंडरग्राउंड दोनों खदानों के लिए मान्य होगा। यह नियम पहले इ-3 से इ-4 पदोन्नति पर लागू था, जिसे अब ई-2 से ई-3 पर लागू किया गया है। चिकित्सा संवर्ग में ई-3 और ई-4 में प्रवेश के लिए निर्धारित योग्यता को क्रमश: ई-2 और ई-3 के लिए मान्य किया गया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जहां तक अलग से कोई प्रावधान नहीं किया गया है, वहां ई-1 स्तर की न्यूनतम योग्यता उच्च ग्रेडों पर भी लागू होगी। वेतन वृद्धि को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पहली वेतन वृद्धि एक वर्ष की प्रशिक्षण अवधि सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद अगले माह की पहली तारीख से लागू होगी। इसके बाद हर वर्ष एक अप्रैल को वार्षिक वेतन वृद्धि की जाएगी। हर 1 अप्रैल को सालाना इंक्रीमेंट तीन प्रतिशत का होगा। कोल इंडिया ने स्पष्ट किया है कि ये सभी प्रावधान भविष्य में जारी होने वाले भर्ती विज्ञापनों पर ही लागू होंगे। 23 मार्च 2026 के बाद अधिसूचित भर्तियों पर प्रभावी रहेंगे। नए नियमों का सबसे बड़ा सामाजिक असर कोयलांचल के मजदूर परिवारों और उनके इलाज पर पड़ेगा।कोयलांचल क्षेत्रों में एसईसीएल के अस्पताल डाक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। नए नियम से विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती आसान होगी। इसका सीधा लाभ खदानों में काम करने वाले मजदूरों और उनके परिवारों को मिलेगा, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता था।
गैर-चिकित्सा संवर्ग में एंट्री ग्रेड अब ई-1 होगा। पहले कई संवर्गों में सीधी भर्ती ई-2 से होती थी। वेतनमान 60 हजार से 1 लाख 80 हजार रुपए तय किया गया है। इससे कोयला क्षेत्रों के सामान्य परिवारों के युवाओं के लिए कोल इंडिया की नौकरी का दरवाजा खुलेगा। पहले साल प्रबंधन प्रशिक्षु और दूसरे साल से अधिकारी का पदनाम मिलेगा। वहीं दूसरी ओर माइनिंग संवर्ग में ई-2 से ई-3 प्रमोशन के लिए अब अनरिस्ट्रिक्टेड सेकंड क्लास माइन मैनेजर सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया गया है। यह सर्टिफिकेट ओपेनकास्ट और भूमिगत दोनों खदानों के लिए वैध होना चाहिए। पहले यह शर्त ई-3 से ई-4 पद पर प्रमोशन पर थी। जानकार बताते हैं कि कोयलांचल में सैकड़ों माइनिंग इंजीनियर ऐसे हैं जिनके पास रिस्ट्रिक्टेड सर्टिफिकेट है। उनका प्रमोशन अब रुक जाएगा। उन्हें दोबारा परीक्षा पास करनी होगी। इससे खदानों में सुरक्षा मानकों के और सख्त होने की उम्मीद है।
23 अप्रैल / मंथन मित्तल



