कोरबा (मंथन) रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में गेवरा से पेंड्रारोड तक बन रहा ईस्ट-वेस्ट रेल कॉरिडोर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। करीब 135 से 157 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना के तहत रेल पटरी बिछाने, पुल-पुलिया, अंडरब्रिज और ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन पोल लगाने का काम लगभग पूरा हो गया है। इसके शुरू होने से कोयला परिवहन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद हैद्यइस परियोजना में हाल ही में पेंड्रारोड से भाड़ी स्टेशन के बीच 24 किलोमीटर लंबे नए रेल ट्रैक पर इंजन का सफल ट्रायल किया गया। इस दौरान रेलवे और इरकॉन के अधिकारी मौजूद रहे। परियोजना पूरी होने के बाद पेंड्रारोड एक महत्वपूर्ण रेल जंक्शन के रूप में विकसित हो सकता है।
इससे कोरबा, गेवरा और पेंड्रा क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलेगी। कॉरिडोर का सबसे बड़ा उद्देश्य कोरबा की गेवरा और दीपका कोयला खदानों से माल ढुलाई के लिए सीधा और वैकल्पिक रेल मार्ग तैयार करना है। वर्तमान रेल नेटवर्क पर मालगाडिय़ों का दबाव कम करने के साथ इस नए रूट से कोयले की आपूर्ति अधिक सुगम बनाने की योजना है। बिलासपुर के सीनियर डीसीएम अनुराग सिंह के मुताबिक, कॉरिडोर शुरू होने से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के उद्योगों तक कोयले की आपूर्ति तेज और निर्बाध हो सकेगी। इससे माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। परियोजना के तहत पेंड्रारोड से भाड़ी स्टेशन के बीच 24 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर रेल इंजन चलाकर परीक्षण किया गया। इस ट्रायल में रेलवे और इरकॉन के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसे परियोजना की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रेल लाइन के साथ पुल-पुलिया, अंडरब्रिज और विद्युतीकरण से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं। अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब इस कॉरिडोर को शुरू करने की दिशा में गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं।
गेवरा रोड से पेंड्रारोड तक प्रस्तावित रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 135 से 157 किलोमीटर बताई गई है। परियोजना की अनुमानित लागत 3,000 से 3,923 करोड़ रुपये के बीच है। इसका रूट गेवरा रोड, दीपका, कटघोरा, पसान होते हुए पेंड्रारोड तक प्रस्तावित है। इस रेल कॉरिडोर का फायदा केवल माल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी बन सकती हैं। इससे कोरबा, गेवरा और पेंड्रा के बीच आवागमन आसान होगा और क्षेत्रीय रेल संपर्क मजबूत हो सकेगा। कुल मिलाकर, ईस्ट-वेस्ट रेल कॉरिडोर कोरबा के कोयला उद्योग और क्षेत्रीय परिवहन के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके शुरू होने से माल ढुलाई की क्षमता बढऩे के साथ पेंड्रारोड की रेल नेटवर्क में भूमिका भी मजबूत होने की उम्मीद है।
01 नवंबर / मंथन मित्तल





