* राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना बनी बेरोजगार युवा के स्वावलंबन की मजबूत नींव
कोरबा (मंथन) कभी रोजगार की तलाश और आर्थिक तंगी से जूझ रहे 28 वर्षीय मिनेश राठिया के लिए आज उनकी डेयरी ही आत्मनिर्भरता का आधार बन गई है। करतला विकासखंड के ग्राम करतला निवासी मिनेश राठिया ने शासन की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना का लाभ लेकर न केवल अपने लिए स्वरोजगार का रास्ता बनाया, बल्कि अपनी छोटी सी डेयरी को भी आगे बढ़ाया है। दो उन्नत नस्ल के दुधारू मवेशी से शुरू हुआ उनका सफर अब पांच दुधारू मवेशी तक पहुंच चुका है।
योजना का लाभ मिलने से पहले मिनेश बेरोजगार थे। परिवार में पहले से देशी नस्ल की दुधारू मवेशी थीं, लेकिन उनसे होने वाला दुग्ध उत्पादन इतना कम था कि परिवार की दैनिक जरूरतें ही मुश्किल से पूरी हो पाती थीं। बिक्री के लिए दूध बचता ही नहीं था। उन्नत नस्ल की दुधारू मवेशी को खरीदकर डेयरी व्यवसाय शुरू करने की इच्छा थी, लेकिन आर्थिक स्थिति इसकी अनुमति नहीं देती थी। ऐसे समय में पशु चिकित्सालय करतला के डॉ. विरेन्द्रपाल सिंह कंवर से उन्हें राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना की जानकारी मिली। योजना ने मिनेश के सपनों को नई दिशा दी और उन्होंने पशु चिकित्सालय में आवेदन प्रस्तुत किया।
वर्ष 2024-25 में योजना के अंतर्गत मिनेश को दो दुधारू मवेशी की खरीद के लिए 93 हजार 300 रुपये की सहायता मिली। इन उन्नत नस्ल की गायों के डेयरी में शामिल होते ही उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हो गई। दूध का उत्पादन बढ़ा तो घर की जरूरतें पूरी करने के बाद दूध बिक्री से आमदनी भी होने लगी। मिनेश ने इस आय को खर्च करने के बजाय अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में लगाया। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि उन्होंने धीरे-धीरे तीन और उन्नत नस्ल ke दुधारू मवेशी खरीद लीं। आज मिनेश के पास कुल पांच उन्नत नस्ल के दुधारू मवेशी हैं और डेयरी उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
मिनेश के जीवन में आए बदलाव की एक तस्वीर उनके साधनों में भी दिखाई देती है। कभी दूध बेचने के लिए उनके पास केवल साइकिल थी। डेयरी से होने वाली आमदनी बढ़ी तो उन्होंने मोटरसाइकिल खरीदी। अब वे आसानी से दूध लेकर बाजार और ग्राहकों तक पहुंच जाते हैं। यह मोटरसाइकिल उनके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि बेरोजगारी से आत्मनिर्भरता तक की यात्रा का प्रतीक बन गई है।
डेयरी व्यवसाय से होने वाली आय में वृद्धि के साथ मिनेश के परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले की तुलना में बेहतर हुई है। उनकी वार्षिक आय अब 30 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है। सबसे बड़ा बदलाव उनके आत्मविश्वास में आया है। जो युवा कभी रोजगार की तलाश में था, आज स्वयं का व्यवसाय संचालित कर रहा है और उसे आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है। गांव में भी मिनेश की मेहनत और सफलता को पहचान मिली है। आज गांव के बुजुर्ग अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए मिनेश के उदाहरण से प्रेरित करते हैं।
मिनेश राठिया कहते हैं, “मैं शासन की इस योजना से बहुत प्रसन्न हूं। योजना से मिली सहायता ने मुझे बेरोजगारी के दौर से बाहर निकलकर अपना काम शुरू करने का अवसर दिया। दो दुधारू मवेशी से शुरू हुआ। मेरा डेयरी व्यवसाय आज पांच दुधारू मवेशी तक पहुंच गया है। अब मेरा सपना है कि मैं अपनी डेयरी को और बड़ा करूं और अपने परिवार को और बेहतर भविष्य दूं। इस सहयोग के लिए मैं पशुधन विकास विभाग और शासन का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”
मिनेश की कहानी बताती है कि जब युवा की मेहनत को सही समय पर शासकीय योजना का सहारा मिलता है, तो सहायता की छोटी सी शुरुआत भी आत्मनिर्भरता की बड़ी कहानी लिख सकती है। राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना ने मिनेश को केवल दुधारू गायें नहीं दीं, बल्कि रोजगार, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का अवसर दिया है।
26 सितंबर / मंथन मित्तल





