* शासकीय योजनाओं का मिला संबल
* 50 से बढ़कर 80 क्विंटल धान का किया उत्पादन-विक्रय
कोरबा (मंथन) कोरबा ब्लॉक के ग्राम कछार निवासी कृषक आनंद सिंह कंवर के लिए खेती अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गई है। लगभग 6 एकड़ कृषि भूमि पर धान की खेती करने वाले आनंद सिंह बताते हैं कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं और समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता ने खेती के प्रति उनका भरोसा और उत्साह दोनों बढ़ाया है।
कृषक आनंद सिंह बताते हैं कि वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ कृषक उन्नति योजना के माध्यम से मिलने वाली अतिरिक्त सहायता ने खेती को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि प्रति क्विंटल धान पर 3100 रुपये मिलने से किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिल रहा है। इससे कृषि कार्यों में निवेश करने और उत्पादन बढ़ाने का हौसला भी बढ़ा है।
मेहनत और शासकीय सहयोग का असर कृषक आनंद सिंह की खेती में साफ दिखाई देता है। पिछले वर्ष उन्होंने 50 क्विंटल धान की बिक्री की थी, जबकि इस वर्ष उन्होंने 80 क्विंटल धान बेचकर अपनी कृषि आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने प्राप्त राशि का उपयोग केवल घरेलू जरूरतों में ही नहीं किया, बल्कि खेती को और बेहतर बनाने में भी लगाया। खेतों में सिंचाई सुविधा को मजबूत करने के लिए उन्होंने मोटर पंप खरीदा है। इससे फसलों को समय पर पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है और भविष्य में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद भी है।
कृषक आनंद सिंह धान खरीदी केंद्र की व्यवस्थाओं को भी किसानों के लिए उपयोगी बताते हैं। उनका कहना है कि खरीदी केंद्रों में किसानों की सुविधा का ध्यान रखा जाता है, जिससे धान बेचने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और सुगम हुई है। उचित मूल्य पर धान की खरीदी और योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली सहायता से किसानों को अपनी मेहनत का लाभ मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि कृषक सम्मान निधि जैसी योजनाओं ने भी किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। समय-समय पर मिलने वाली सहायता से खेती से जुड़े छोटे-बड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती है और किसान बिना अतिरिक्त आर्थिक दबाव के अपने कृषि कार्य को आगे बढ़ा सकते हैं।
आनंद सिंह एक प्रगतिशील किसान के रूप में आगे बढ़ रहे हैं और उनकी सफलता ग्राम कछार सहित जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
16 सितंबर / मंथन मित्तल





