कोरबा (मंथन) पॉवर हब कोरबा सहित प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को एक और झटके के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहना पड़ेगा। वजह बताई जा रही है कि बिजली कंपनी उनसे ईंधन खरीदी और खपत की राशि का सरचार्ज वसूलने की मानसिकता में है। इसे एफपीपीएएस का नाम दिया गया है। खबर यह भी है कि सितंबर के बिल में ही यह सरचार्ज जुडक़र आ सकता है जो लगभग 13 फीसदी होगा। दूसरी ओर वितरण कंपनी के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि इस तरह की सूचनाएं हैं तो जरूर लेकिन उनके पास अधिकृत रूप से कोई सर्कुलर नहीं मिला है।
जानकारी के अनुसार कहा गया कि पॉवर सेक्टर अपनी व्यवस्थाओं के तहत समय-समय पर परिवर्तन करते हैं। इसमें कई तरह के चार्ज जोडऩे और समायोजित करने के प्रावधान हैं। इसी के अंतर्गत प्रस्तावित एफपीपीएएस में 8 प्रतिशत लंबित शुल्क और 5 प्रतिशत नए शुल्क देना पड़ सकता है। कुल मिलाकर 13 फीसदी सरचार्ज की वसूली उपभोक्ताओं से करने की योजना है। दावा किया जा रहा है कि पॉवर सेक्टर एफपीपीएएस शुल्क बिजली खरीद की लागत और अन्य परिस्थितियों के आधार पर हर महीने निर्धारित किया जाता है। इसे परिवर्तनीय बताया जाता है। बिजली का उत्पादन करने के लिए लगने वाले कोयला, गैस या अन्य तत्वों की उपलब्धता, इन पर होने वाले खर्च व खपत को इसमें पैरामीटर बनाया गया है।
एफपीपीएएस बिजली की खपत की मूल दर से अलग एक समायोजन शुल्क है और इसकी वास्तविक दर संबंधित अवधि के लिए जारी आधिकारिक आदेश/बिलिंग व्यवस्था के अनुसार निर्धारित होती है। यही वजह है कि बिजली बिल में इस शुल्क की दर लगातार बदलती रहती है। कहा जा रहा है कि अगर पॉवर कंपनी छत्तीसगढ़ में अंतिम रूप से एफपीपीएएस को प्रभावशील करती है तो इस तरह उपभोक्ताओं के सितंबर के बिजली बिल में दोनों शुल्क का संयुक्त असर दिखाई दे सकता है। हालांकि कोरबा में वितरण कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इस तरह की सूचनाएं संचार माध्यम तक सीमित है, हमारे पास प्रमाणिक तौर पर कोई सर्कुलर सरकार के कंपनी की ओर से नहीं पहुंची है।
लगातार होता रहा बदलाव
ज्ञात रहे इस साल लगातार बदलती रही एफपीपीएएस की दर इस साल बिजली बिलों में एफपीपीएएस शुल्क में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। जनवरी में उपभोक्ताओं के बिल पर करीब 13.64 प्रतिशत एफपीपीएएस शुल्क का प्रभाव पड़ा था। इसके बाद अलग-अलग महीनों में इसकी दर में बदलाव होता रहा। मार्च और अप्रैल के दौरान शुल्क में कुछ कमी देखने को मिली।
10 सितंबर / मंथन मित्तल





