* पिछले 37 दिनों में 381.6 मिमी वर्षा दर्ज
कोरबा (मंथन) कोरबा जिले में मानसून की लगातार सक्रियता का सकारात्मक असर अब जल संसाधन विभाग के जलाशयों में साफ दिखाई देने लगा है। बीते 37 दिनों के दौरान जिले में औसतन 381.6 मिमी वर्षा दर्ज होने से जल संसाधन विभाग के कई छोटे जलाशय तेजी से भर गए हैं। ग्राम कोनकोना, मड़वाढोढ़ा, धौंराभांठा और छुरीकला समेत आधा दर्जन से अधिक जलाशयों से पानी ओवरफ्लो होने लगा है, जबकि 12 से अधिक जलाशयों में 60 से 80 प्रतिशत तक जलभराव हो चुका है। मानसून की यही रफ्तार बनी रही तो अगस्त के प्रथम सप्ताह तक जिले के 40 में से अधिकांश जलाशयों के पूर्ण भराव की संभावना है।
कोरबा जिले में बांगो और दर्री जैसे बड़े बांध होने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए छोटे जलाशयों पर ही निर्भर हैं। दरअसल दर्री बांध की दायीं और बायीं तट नहरों की ऊंचाई कई स्थानों पर खेतों से नीचे होने के कारण बांध का पानी पर्याप्त मात्रा में खेतों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में माइनर जलाशय किसानों के लिए सिंचाई का प्रमुख आधार बने हुए हैं। सप्ताह भर पहले तक जल संसाधन विभाग का कोई भी जलाशय पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुंचा था, लेकिन पिछले पांच दिनों में हुई झमाझम वर्षा से जलभराव की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। विशेषकर पसान और पोड़ी-उपरोड़ा तहसील में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि अत्यधिक वर्षा के कारण कई स्थानों पर पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचा है और खेतों की मेड़ भी टूट गई है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानसून का लगभग ढाई से तीन माह का समय अभी शेष है। ऐसे में यदि वर्षा सामान्य रही तो जिले के सभी जलाशय पूरी तरह भर सकते हैं, जिससे खरीफ के साथ-साथ रबी फसल के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा। जिले में जल संसाधन विभाग के 40 मायनर जलाशय हैं, जिनका उपयोग सिंचाई के साथ-साथ मत्स्य पालन के लिए भी किया जाता है। वर्तमान में खेतों में पर्याप्त पानी होने के कारण जलाशयों की नहरें बंद रखी गई हैं। इन 40 जलाशयों में से 23 मछुआ समूहों को मत्स्य पालन के लिए लीज पर दिया गया है। इस वर्ष जलाशयों में तेजी से हो रहे भराव को देखते हुए अधिक मात्रा में मत्स्य बीज छोड़े जा रहे हैं। इससे आगामी दिनों में मछली उत्पादन बढ़ने और मछुआ समूहों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।
31 जुलाई / मंथन मित्तल



