* उन्नति समूह की महिलाओं ने रची सफलता की नई कहानी
कोरबा (मंथन) कोरबा जिला बालकोनगर में महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास की दिशा में एक नई पहल के रूप में ‘ब्लैक मेज़’ फाइन डाइनिंग कैफे का शुभारंभ किया गया। प्रोजेक्ट उन्नति से जुड़ी महिलाओं द्वारा संचालित यह कैफे आज आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और सतत आजीविका का प्रेरक मॉडल बनकर उभर रहा है। ताज़ा व्यंजनों की खुशबू, आकर्षक डाइनिंग स्पेस और आत्मविश्वास से मेहमानों का स्वागत करती महिलाओं की मुस्कान ‘ब्लैक मेज़’ की सफलता की कहानी बयां करती है।
कभी ‘उन्नति चौपाल’ के रूप में शुरू हुआ यह छोटा फास्ट-फूड केंद्र अब आधुनिक सुविधाओं से लैस फाइन डाइनिंग कैफे में बदल चुका है, जहां 50 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था के साथ निजी आयोजनों के लिए विशेष डाइनिंग स्पेस भी तैयार किया गया है।बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि संस्था समुदाय, विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि आसपास के क्षेत्रों की 6 हजार से अधिक महिलाएं आज आर्थिक सशक्तिकरण और परिवारों के दीर्घकालिक विकास की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘ब्लैक मेज़’ जैसी पहल अन्य महिलाओं को भी अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगी।
इस कैफे की सबसे खास बात यह है कि यहां परोसे जाने वाले हर व्यंजन के पीछे संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की कहानी छिपी है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रोजेक्ट उन्नति के तहत व्यंजन कला, ग्राहक प्रबंधन, आतिथ्य सेवा, खाद्य गुणवत्ता और उद्यमिता का विशेष प्रशिक्षण दिया गया, जिसने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास प्रदान किया। उन्नति समूह की सदस्य निर्मला देशमुख ने बताया कि वर्ष 2022 में उन्नति से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। वहीं समूह की सदस्य भारती ने कहा कि आज उन्हें अपनी पहचान और हुनर पर गर्व महसूस होता है। ‘ब्लैक मेज़’ में छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों के साथ उत्तर भारतीय, चाइनीज़ और फास्ट-फूड का विशेष स्वाद उपलब्ध है। कैफे का वातावरण स्थानीय संस्कृति और आधुनिकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
गौरतलब है कि प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम से अब तक 560 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया जा चुका है। इन समूहों से जुड़ी 6 हजार से अधिक महिलाएं विभिन्न सूक्ष्म और लघु उद्यमों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
22 मई / मंथन मित्तल



