* शिक्षा अधिकार कानून के तहत स्थायी व्यवस्था पर जोर
कोरबा (मंथन) जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र क्रमांक 11 एवं गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष विद्वान सिंह मरकाम ने सामान्य सभा में क्षेत्र के अहम मुद्दों के साथ शाला से बाहर बच्चों की गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाया। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड से सामने आया 833 बच्चो का आंकड़ा शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है।
निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे आज भी स्कूल से दूर हैं। इसके पीछे स्कूल की दूरी, गरीबी, घरेलू जिम्मेदारियां, दस्तावेजों की कमी, पलायन और बीमारी जैसे कारण प्रमुख हैं। आंकड़ों के अनुसार 319 बच्चे स्कूल की दूरी के कारण शिक्षा से वंचित हैं, जबकि 235 बच्चे घरेलू कार्यों में लगे हुए हैं। 140 बच्चों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं हैं, 57 पलायन के कारण पढ़ाई से दूर हैं, 39 बच्चे बीमारी से प्रभावित हैं और 37 बच्चे पारिवारिक व आर्थिक कारणों से स्कूल नहीं जा पा रहे। इसके अलावा 6 बच्चे ऐसे हैं, जो माता-पिता विहीन हैं। कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि ऐसे बच्चों को आयु अनुरूप कक्षा में प्रवेश देकर विशेष प्रशिक्षण (ब्रिज कोर्स) के माध्यम से मुख्यधारा में जोड़ा जाए। लेकिन क्षेत्र में स्थायी और प्रभावी प्रशिक्षण केंद्रों की कमी इस लक्ष्य को अधूरा बना रही है।
स्थानीय स्तर पर एस्पायर संस्था और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित डोनेशन आधारित आवासीय ब्रिज कोर्स केंद्र ने सकारात्मक परिणाम जरूर दिए हैं, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शासन स्तर पर स्थायी और संरचित व्यवस्था की तत्काल आवश्यकता है। इसी बैठक में कोरबी और पसान में सहकारी बैंक शाखाएं खोलने का प्रस्ताव भी रखा गया, जो क्षेत्र के समग्र विकास की जरूरतों को दर्शाता है। शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का संतुलित विकास ही समाज को आगे बढ़ा सकता है।अब आवश्यकता है कि प्रशासन इस गंभीर विषय को प्राथमिकता देते हुए ठोस और त्वरित निर्णय ले। क्योंकि यह मुद्दा केवल 833 बच्चों का नहीं, बल्कि उनके भविष्य, उनके अधिकार और समाज के विकास से जुड़ा हुआ है।
25 अप्रैल / मंथन मित्तल



