* वन्य प्राणियों के हमले का बना हुआ हैं खतरा
* सुबह से जंगल की ओर रूख कर रहे ग्रामीण
कोरबा (मंथन) कोरबा जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों महुआ संग्रहण का कार्य जोर-शोर से शुरू हो गया है। अलसुबह से ही ग्रामीण खासकर महिलाएं और बच्चे, जंगलों की ओर महुआ बीनने निकल पड़ते हैं। महुआ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, जिससे लोगों को अतिरिक्त आमदनी का सहारा मिलता है। वन्यप्राणियों के खतरे के बीच महुआ संग्रहण का काम जारी है। इस दौरान जंगलों में जंगली जानवरों की मौजूदगी से खतरा भी लगातार बना हुआ है।
वन क्षेत्रों में हाथी और भालू के विचरण की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे महुआ बीनने जाने वाले ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई इलाकों में हाथियों के झुंड देखे जाने की सूचना मिली है, वहीं भालू के हमले की आशंका भी बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि महुआ सीजन उनके लिए बेहद जरूरी होता है, इसलिए जोखिम के बावजूद उन्हें जंगल जाना पड़ता है। सुबह और शाम के समय वन्यजीवों की गतिविधि ज्यादा रहने से खतरा और बढ़ जाता है। कई बार अचानक आमना-सामना होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। वन विभाग द्वारा लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
अधिकारियों ने अपील की है कि ग्रामीण समूह में ही जंगल जाएं, शोर करते रहें और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत सूचना दें। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी भी बढ़ाई जा रही है। इधर ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि महुआ संग्रहण के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि वे बिना डर के अपने काम को कर सकें। महुआ सीजन जहां एक ओर आजीविका का सहारा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी ने इसे जोखिम भरा भी बना दिया है।
30 मार्च / मंथन मित्तल



