
* विशाखा कमेटी को शिकायत के बाद भी कार्यवाही अब तक शून्य
* अभद्रता, मानसिक प्रताड़ना और अशोभनीय व्यवहार का लगाया गया हैं आरोप
* कभी भी कर सकते है आंदोलन
कोरबा (मंथन) जानकारी के अनुसार कोरबा जिले के नगर सेना विभाग में महिला सैनिकों के साथ कथित अभद्र व्यवहार, मानसिक प्रताड़ना, अपमानजनक टिप्पणियों और अशोभनीय आचरण का मामला गंभीर प्रशासनिक सवाल बनता जा रहा है। बताया जा रहा हैं की विशाखा कमेटी को शिकायत दिए हुए लगभग तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जांच शुरू नहीं होने से महिला सैनिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
विभाग के भीतर हालात इतने तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं कि महिला सैनिकों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। लगातार शिकायतों, लिखित आवेदनों और उच्च अधिकारियों तक मामला पहुंचाने के बावजूद यदि अब भी कार्यवाही नहीं होती, तो यह नाराजगी कभी भी उग्र आंदोलन का रूप ले सकती है।
* महिला सैनिकों ने उठाए प्रशासन पर गंभीर सवाल
नगर सेना विभाग में तैनात महिला सैनिकों और अन्य सैनिकों द्वारा दिए गए शिकायत पत्रों में जिला सेनानी के खिलाफ अशोभनीय व्यवहार, मानसिक दबाव, अपमानजनक लहजे और महिला गरिमा के प्रतिकूल आचरण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने केवल मौखिक विरोध नहीं किया, बल्कि मामले को विधिवत लिखित रूप में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, महिला आयोग, विभागीय अधिकारियों और विशाखा कमेटी तक पहुंचाया।
इसके बावजूद यदि जांच की प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो रही, ऐसे में शिकायतकर्ताओं के अनुसार महिला सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों को हल्के में लेने जैसा है। महिला सैनिकों का कहना है कि जब एक संवेदनशील शिकायत पर भी समयबद्ध कार्यवाही नहीं होती, तो इससे पीड़ित पक्ष का भरोसा व्यवस्था से उठने लगता है।
* विशाखा कमेटी को भी दिया आवेदन
जानकारी के अनुसार, महिला सैनिकों ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न और अपमानजनक व्यवहार को लेकर संबंधित मंचों पर आवेदन दिया था। इस मामले को विशाखा कमेटी तक भी पहुंचाया गया, ताकि निष्पक्ष जांच हो और पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सके। लेकिन अब आरोप यह है कि तीन महीने गुजर जाने के बाद भी जांच प्रारंभ तक नहीं हुई।
बताया जा रहा हैं की यदि प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी अब भी चुप्पी साधे रहे, तो यह मामला कभी भी फूट पड़ सकता है। महिला सैनिकों और अन्य कर्मचारियों के बीच लगातार बढ़ती नाराजगी इस ओर संकेत कर रही है कि यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई, तो मामला धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन, विरोध मार्च या कानूनी मोर्चे तक पहुंच सकता है।
07 अप्रैल / मंथन मित्तल



