कोरबा (मंथन) कोरबा-पश्चिम एसईसीएल गेवरा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत अमगांव के भू-विस्थापितों ने मुआवजा भुगतान में देरी और प्रबंधन पर संवेदनहीनता का गंभीर आरोप लगाया है। लिखित शिकायत करते हुए मोर्चा खोलने की चेतावनी दी है।
पीड़ितों का कहना है कि वर्षों पहले जमीन और मकान अधिग्रहित किए जाने के बावजूद आज भी दर्जनों परिवार अपनी जायज राशि के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। पीड़ित का कहना है कि उनकी संपत्तियों का अर्जन हो चुका है, लेकिन पिछले 6 महीनों से मुआवजे की राशि बिलासपुर मुख्यालय स्तर पर अकारण रोकी गई है। इससे परिवारों के सामने भरण-पोषण और आर्थिक संकट की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। ग्राम अमगांव के ही एक अन्य भू-विस्थापित ने बताया कि उनकी दिवंगत पुत्री के नाम पर निर्धारित मुआवजा राशि 3 साल बीत जाने के बाद भी नहीं मिली है। उनका कहना है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे 11 अप्रैल से पूरे परिवार के साथ मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।
ग्राम अमगांव के रोहिदास मोहल्ला निवासी सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूरे गांव का पुनर्वास और मुआवजा हो चुका है, लेकिन विशेष वर्ग के समूह को जानबूझकर उपेक्षित रखा जा रहा है। 2023 में मूल्यांकन होने के बावजूद उन्हें आज तक लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बार-बार गुहार लगाई, लेकिन प्रबंधन की उदासीनता खत्म नहीं हो रही है। अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
03 अप्रैल / मंथन मित्तल



